लाल सागर में हूती विद्रोहियों की धमकी का असर, भारत और चीन जाने वाले तेल टैंकरों ने बदला रास्ता
हूती विद्रोहियों की नौका नाकाबंदी और धमकियों के बाद भारत और चीन जाने वाले सऊदी अरब के तेल टैंकरों ने लाल सागर में यू-टर्न ले लिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहरा गया है।

लाल सागर में तेल आपूर्ति को लेकर एक बार फिर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद, सऊदी अरब से भारत और चीन की ओर क्रूड ऑयल लेकर जा रहे तीन तेल टैंकरों ने मंगलवार को लाल सागर में अपना रास्ता बदल लिया। अब ये टैंकर यमनी तट के पास अपनी यात्रा जारी रखने के बजाय स्वेज नहर की ओर बढ़ रहे हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला हूती विद्रोहियों की उस चेतावनी के बाद लिया गया है जिसमें उन्होंने सऊदी बंदरगाहों पर कार्गो की आवाजाही पर रोक लगाने की घोषणा की थी। विद्रोही समूह ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी थी कि सऊदी बंदरगाहों पर लोडिंग या अनलोडिंग करने वाले जहाजों को किसी भी स्थान पर निशाना बनाया जा सकता है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराया खतरा
जानकारों का मानना है कि हूती विद्रोहियों का यह कदम अमेरिका-इजराइल संघर्ष में एक नया मोर्चा खोल सकता है। इससे न केवल खाड़ी क्षेत्र बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर भी गंभीर जोखिम पैदा हो गया है।
फारस की खाड़ी तक पहुंच प्रदान करने वाली हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संघर्ष के कारण ब्लॉक होने के बाद, सऊदी अरब का यानबू (Yanbu) बंदरगाह मध्य पूर्वी क्रूड के निर्यात के लिए एक मुख्य वैकल्पिक रास्ता बन गया था, जहां से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल भेजा जाता है।
कौन से टैंकरों ने बदला रास्ता?
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्ग बदलने वाले इन जहाजों में ‘शिन लॉन्ग यांग’ (Xin Long Yang), ‘रोडोस’ (Rodos) और ‘अमाजोन’ (Amazon)शामिल हैं। इन टैंकरों का यू-टर्न लेना इस बात का संकेत है कि वैश्विक शिपिंग कॉरिडोर पर एक बार फिर बड़ा व्यवधान आ सकता है, जिससे भारत और चीन जैसे बड़े आयातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।





