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भारत में ग्रीन स्टील को बढ़ावा: 43 प्लांट्स को मिला ‘ग्रीन स्टील सर्टिफिकेट’

भारत सरकार ने स्टील उद्योग को नेट-ज़ीरो लक्ष्य (2070) के अनुरूप हरित ऊर्जा की तरफ ले जाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। ग्रीन स्टील उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालयों और उद्योगों के साथ मिलकर एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। आइए समझते हैं सरकार के इन प्रमुख प्रयासों को आसान भाषा में—

स्टील मंत्रालय ने 23 दिसंबर 2024 को ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी जारी की, जिसके तहत कम उत्सर्जन वाले स्टील की पहचान और वर्गीकरण किया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत अब तक 43 निजी स्टील यूनिट्स को ‘ग्रीन स्टील सर्टिफिकेट’ दिया जा चुका है।

इन 43 प्लांट्स की कुल उत्पादन क्षमता 11.6 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जिनमें से 7.1 मिलियन टन स्टील को ‘ग्रीन स्टील’ के रूप में बनाया जा रहा है।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत स्टील मंत्रालय को साल 2029-30 तक 455 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
इस राशि से हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर आधारित 4 पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।

इनमें शामिल हैं:

1 सरकारी स्टील कंपनी (CPSE)

3 निजी स्टील कंपनियाँ

ये प्रोजेक्ट स्टील उत्पादन में कोयले की जगह धीरे-धीरे हाइड्रोजन का उपयोग बढ़ाने पर केंद्रित हैं।

ग्रीन स्टील सेक्टर के लिए रोडमैप जारी

स्टील मंत्रालय ने हाल ही में एक विस्तृत रिपोर्ट—“Greening the Steel Sector in India: Roadmap and Action Plan”—जारी की है। यह रिपोर्ट 14 टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर तैयार की गई है और भारत को 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने में स्टील सेक्टर की भूमिका को मजबूत बनाएगी।

भारत का स्टील उद्योग दुनिया के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, और अब सरकार की नई नीतियाँ इसे एक स्वच्छ, टिकाऊ और आधुनिक दिशा देने की तैयारी में हैं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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