संसद में बच्चों की खांसी की दवाओं की सुरक्षा पर गहरी चिंता

संसद के शीतकालीन सत्र में बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले खांसी के सिरप की गुणवत्ता और सुरक्षा बड़ी बहस का विषय बनी। कई सांसदों ने हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में संदिग्ध कफ सिरप के कारण बच्चों के बीमार होने और मौतों की घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की।
राज्यों में दूषित बैच और बढ़ी सतर्कता
जांच में यह सामने आया कि कुछ सिरपों में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) जैसी खतरनाक रसायन मात्रा पाई गई, जिसके बाद कई राज्यों ने संबंधित बैचों को त्वरित रूप से बाजार से हटाया। राज्य सरकारों ने निर्माण इकाइयों की निगरानी बढ़ाई है और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी है।
केंद्र सरकार की कार्रवाई और CDSCO की जांच
केंद्र ने बताया कि CDSCO ने छह राज्यों में “रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन” शुरू कर दी है। इसके साथ ही दवाओं की निर्माण प्रक्रिया और कच्चे माल की ट्रेसबिलिटी को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए मजबूत किया जा रहा है। सरकार ने सभी राज्यों को संशोधित दवा निर्माण मानकों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।
बच्चों के लिए दवा उपयोग पर नई सावधानियाँ
संसद को जानकारी दी गई कि छोटे बच्चों, विशेषकर दो साल से कम आयु के बच्चों में कफ सिरप का उपयोग अब केवल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए। कई राज्यों ने डॉक्टरों और माता-पिता दोनों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
जनवरी 2026 तक वैश्विक मानकों पर दवा निर्माण का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों को जनवरी 2026 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) अपनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दवा उत्पादन की किसी भी खामी को सख्ती से संबोधित किया जाएगा।





