लखनऊ में साइबर ठगी का बड़ा मामला, 85 वर्षीय बुजुर्ग से 84.5 लाख रुपये ठगे

लखनऊ में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को पुलिस और एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) अधिकारी बताकर 85 वर्षीय रिटायर्ड ट्रेजरी अधिकारी को कथित “डिजिटल अरेस्ट” में फंसाया और उनसे 84.5 लाख रुपये ठग लिए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित बदनुद्दीन अंसारी को 7 मार्च को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनका नाम पुणे, महाराष्ट्र से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि उनके नाम से अवैध बैंक खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल गैरकानूनी लेनदेन में हुआ।
ठगों ने अपने झूठ को सच साबित करने के लिए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी दस्तावेज भी भेजे। इन दस्तावेजों पर NIA, सुप्रीम कोर्ट और RBI जैसी संस्थाओं के नाम दिखाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 27 दिनों तक कई लोग खुद को ATS अधिकारी बताकर वीडियो और वॉयस कॉल के जरिए बुजुर्ग के संपर्क में रहे। उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने कॉल काटी या किसी को इस बारे में बताया तो तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
लगातार डर और मानसिक दबाव के कारण बुजुर्ग खुद को ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी स्थिति में महसूस करने लगे। कानूनी कार्रवाई के डर से उन्होंने 11 मार्च से 6 अप्रैल के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 84.5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, ठगी से जुड़े खातों में करीब 27 लाख रुपये फिलहाल फ्रीज कर दिए गए हैं और आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स ने लोगों को सलाह दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या जांच नहीं करती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काटें और साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें।





