
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में महाराष्ट्र स्थित ‘यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक’ (The Yashwant Co-operative Bank) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंक की लगातार गिरती वित्तीय सेहत और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन के कारण यह निर्णय लिया गया है।
क्यों हुई कार्रवाई?
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वह अपने मौजूदा जमाकर्ताओं (Depositors) का पैसा पूरी तरह से वापस करने में सक्षम नहीं है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि यदि यह बैंक अपना कारोबार जारी रखता, तो यह जमाकर्ताओं के हितों के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता था। ‘बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट’ के तहत निर्धारित अनिवार्य शर्तों का पालन न करने के कारण यह कदम उठाया गया है।
जमाकर्ताओं के लिए क्या है राहत की खबर?
लाइसेंस रद्द होने के बाद यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक का बैंकिंग कारोबार 19 मई 2026 से बंद कर दिया गया है। हालांकि, घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए ‘डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन’ (DICGC) का कवच मौजूद है।
RBI के आंकड़ों के अनुसार, बैंक के लगभग 99.02 प्रतिशत जमाकर्ता DICGC बीमा के तहत सुरक्षित हैं। इसका मतलब है कि प्रत्येक जमाकर्ता अपनी जमा राशि के बदले 5 लाख रुपये तक का बीमा दावा प्राप्त करने का हकदार है। 20 अप्रैल 2026 तक, DICGC पहले ही इस संबंध में 106.96 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है।
यह घटना उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है जो को-ऑपरेटिव बैंकों में अपना पैसा निवेश करते हैं। हमेशा ध्यान रखें कि आपका बैंक RBI द्वारा विनियमित है या नहीं और उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है। जमाकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने दावों के निपटान के लिए बैंक के संबंधित दिशानिर्देशों का पालन करें।





