
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील (व्यापार समझौता) अब अपने अंतिम चरण में है। अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने वाशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि लगभग 18 महीने की गहन बातचीत के बाद, यह समझौता अब अंतिम ‘1 से 2 प्रतिशत’ की प्रक्रिया में है।
क्या है पूरा मामला?
वाशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट के दौरान, एंबेसडर Sergio Gor ने स्पष्ट किया कि अधिकांश प्रमुख मुद्दों को सुलझा लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित समझौता दोनों देशों के व्यवसायों के लिए एक ‘Win-Win’ स्थिति पैदा करेगा और व्यापार में अधिक निश्चितता लाएगा।
Sergio Gor ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा और आपसी संबंध बेहद मजबूत हैं। उन्होंने किसी भी तरह की दरार की संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा कि पिछले तीन हफ्तों से लगातार बातचीत चल रही है।
अर्थव्यवस्था और भविष्य की योजनाएं
इस अवसर पर भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी भविष्य का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2030 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही, दोनों देशों का लक्ष्य 500 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना है। इसके लिए बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।
अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी Jacob Helberg ने भारत को अमेरिका का प्रमुख दीर्घकालिक तकनीकी भागीदार बताया, जो चीन से हटकर लचीली आपूर्ति श्रृंखला (resilient supply chains) बनाने में मदद करेगा।





