H-1B वीज़ा संकट: सोशल मीडिया स्क्रीनिंग ने भारतीय आवेदकों के सपने किए चकनाचूर

नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2025 – अमेरिकी सपने देख रहे हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है. यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की ताजा और कड़ी सोशल मीडिया स्क्रीनिंग नीति ने H-1B वीज़ा आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं. इस नई व्यवस्था के चलते असंख्य साक्षात्कार नियुक्तियां अगले वर्ष के लिए स्थगित कर दी गई हैं, जिससे आवेदकों के बीच निराशा और अनिश्चितता का माहौल व्याप्त हो गया है.
देर रात जारी हुई आपातकालीन एडवाइज़री
भारत में अमेरिकी दूतावास ने मंगलवार देर रात एक अत्यंत महत्वपूर्ण सलाह जारी की, जिसमें आवेदकों से मिशन द्वारा भेजे गए पुनर्निर्धारण सूचनाओं का कड़ाई से अनुपालन करने की अपील की गई है.
दूतावास के आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया, “यदि आपको कोई ईमेल प्राप्त हुआ है जिसमें यह सूचित किया गया है कि आपकी वीज़ा नियुक्ति को पुनर्निर्धारित कर दिया गया है, तो मिशन इंडिया आपकी नई तारीख पर आपकी सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है.”
लेकिन इसके साथ ही एक कठोर चेतावनी भी जारी की गई – आवेदकों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया कि वे पुनर्निर्धारण के बाद अपनी मूल तारीखों पर साक्षात्कार के लिए दूतावास न पहुंचें.
एडवाइज़री में आगे दृढ़ता से कहा गया, “अपनी पूर्व निर्धारित मूल नियुक्ति तिथि पर आने पर आपको दूतावास या वाणिज्य दूतावास में प्रवेश की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी.”
सोशल मीडिया की ‘पब्लिक’ निगरानी – नया हथियार
यह संकट अमेरिकी सरकार द्वारा H-1B कुशल कर्मचारी वीज़ा आवेदकों और उनके H-4 आश्रितों के लिए अपनी जांच और सत्यापन प्रणाली को व्यापक रूप से विस्तारित करने के फैसले के बाद उत्पन्न हुआ है.
संशोधित नीति के तहत एक चौंकाने वाली शर्त लागू की गई है – आवेदकों को अपने समस्त सोशल मीडिया खातों पर गोपनीयता सेटिंग्स को “पब्लिक” मोड में रखना अनिवार्य होगा. यह व्यवस्था 15 दिसंबर से प्रभावी होगी, जिससे अमेरिकी अधिकारी आवेदकों की संपूर्ण ऑनलाइन गतिविधियों की बारीकी से समीक्षा कर सकेंगे.
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कड़े नियम
अमेरिकी अधिकारियों ने इस कठोर कदम का औचित्य सिद्ध करते हुए स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों की पहचान करना है जो वीज़ा के लिए अयोग्य हो सकते हैं अथवा राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए संभावित खतरा उत्पन्न कर सकते हैं. उल्लेखनीय है कि छात्र और विनिमय आगंतुक पहले से ही इसी प्रकार की कठोर जांच प्रक्रिया से गुजर रहे हैं.
स्टेट डिपार्टमेंट ने अपने बयान में दृढ़ता से कहा, “प्रत्येक वीज़ा निर्णय एक राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णय है,” और इस व्यापक जांच के पीछे की मंशा पर जोर दिया.
ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख
यह कदम H-1B कार्यक्रम में नवीनतम कठोरता को दर्शाता है, जो विदेशी कुशल पेशेवरों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में अस्थायी रूप से कार्य करने का प्राथमिक मार्ग रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के अधीन इस कार्यक्रम पर लगातार बढ़ता दबाव देखा जा रहा है, जिसने रोजगार आधारित आप्रवासन पर सख्त नियंत्रण की वकालत की है.
सितंबर माह में, ट्रंप ने एक विस्फोटक घोषणा करते हुए नए H-1B कार्य वीज़ा पर एकमुश्त $100,000 की भारी-भरकम शुल्क लगाने का ऐलान किया था. इस निर्णय से भारतीय पेशेवरों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है, जो H-1B लाभार्थियों में सबसे बड़ा समूह गठित करते हैं.
19 देशों पर प्रतिबंध की छाया
हाल ही में, एक अफगान नागरिक द्वारा नेशनल गार्ड सैनिकों पर घातक गोलीबारी की भयावह घटना के बाद अमेरिका ने 19 “चिंताजनक देशों” के आवेदकों के लिए ग्रीन कार्ड, नागरिकता और अन्य आप्रवासन प्रक्रियाओं को भी निलंबित कर दिया है.
भारतीय आवेदकों की बढ़ती पीड़ा
हजारों भारतीय आवेदकों के लिए, यह बढ़ी हुई जांच-पड़ताल पहले से ही जटिल और कठिन वीज़ा प्रक्रिया में अनिश्चितता और विलंब को कई गुना बढ़ा चुकी है. दूतावास अधिकारियों ने नए नियमों के पूर्ण रूप से लागू होने तक धैर्य रखने और विनियमों का सख्ती से पालन करने की अपील जारी की है.
यह संकट न केवल व्यक्तिगत करियर और परिवारों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि भारत-अमेरिका के बीच पेशेवर प्रतिभा के आदान-प्रदान पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है. आने वाले दिनों में इस स्थिति का और क्या रूप लेगा, यह देखना बाकी है.





