तेल की कीमतों में उछाल, 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। Brent crude 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया और कुछ समय के लिए 123 डॉलर तक गया, जबकि WTI भी 108 डॉलर के ऊपर कारोबार करता दिखा।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय आई है जब अमेरिका द्वारा ईरान के निर्यात पर लंबी नाकाबंदी की तैयारी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की खबरें सामने आई हैं।
वैश्विक बाजारों पर असर
तेल की कीमतों में इस तेजी का असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर पड़ा है। GIFT Nifty करीब 0.30% गिर गया, जिससे भारतीय बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली, जबकि अमेरिकी बाजार (Wall Street) लगभग स्थिर बंद हुए।
किन सेक्टर पर पड़ेगा असर
महंगे कच्चे तेल का सीधा असर कई उद्योगों पर पड़ने वाला है। खासतौर पर aviation, logistics, paints और chemicals सेक्टर में लागत बढ़ने की संभावना है।
इससे कंपनियों के खर्च बढ़ेंगे और मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा
भारत के लिए बढ़ती तेल कीमतें बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इससे आयात बिल बढ़ेगा और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
अनुमान है कि रुपया डॉलर के मुकाबले 94.90-94.95 के आसपास खुल सकता है। अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो महंगाई बढ़ सकती है और चालू खाता घाटा भी बढ़ेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें 120 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं तो बाजार में उतार-चढ़ाव लंबे समय तक जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल वैश्विक तनाव और उससे जुड़े हर अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यही आगे बाजार की दिशा तय करेगा।





