
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के 29 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैली महामारी। इलाज और संसाधनों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य अधिकारी।DRC एक बार फिर खतरनाक इबोला वायरस की चपेट में है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 689 लोग इबोला से संक्रमित पाए गए हैं, जबकि 139 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है।
तेजी से फैल रहा संक्रमण
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अकेले गुरुवार को 17 नए मामले सामने आए और 5 और लोगों की मौत हो गई। ये सभी मामले पूर्वी प्रांत ‘इतूरी’ से दर्ज किए गए हैं। यह प्रकोप अब तक इटूरी, उत्तर किवु और दक्षिण किवु सहित तीन प्रांतों के 29 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है। इसके अलावा, 168 संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं, जिनमें से 64 लोगों की मौत हो चुकी है।
क्यों बनी है मुश्किल स्थिति?
स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए स्थिति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल हैं:
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फंड की कमी: स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए 21.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की भारी कमी है।
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संसाधनों का अभाव: उत्तर किवु जैसे क्षेत्रों में संक्रमण रोकने के लिए जरूरी सामान और चिकित्सा आपूर्ति की भारी कमी है।
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अंधविश्वास और जागरूकता की कमी: लोग शवों के पोस्टमार्टम (स्वैबिंग) के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे वायरस को ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है।
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सीमित क्षमता: इबोला उपचार केंद्रों (Ebola Treatment Centres) में मरीजों की संख्या के मुकाबले बेड और क्षमता कम है।
बुंडिबुग्यो स्ट्रेन और इतिहास यूएन हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी के अनुसार, इतूरी में विस्थापित लोगों के शिविर में भी दो मौतें दर्ज की गई हैं। यह प्रकोप 15 मई को आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया था। 1976 में इबोला की पहचान होने के बाद से यह DRC में 17वां प्रकोप है।
फिलहाल जो ‘बुंडिबुग्यो’ (Bundibugyo) स्ट्रेन फैल रहा है, उसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है। वैज्ञानिक और स्वास्थ्य एजेंसियां संभावित टीकों के परीक्षण में जुटी हैं, लेकिन मानवीय चुनौतियां काम को धीमा कर रही हैं।





