US Tariff on India: अमेरिका ने भारत पर 10% ‘Forced Labour’ टैरिफ लगाया, क्या होगा निर्यात और व्यापार पर असर?

US Tariff on India: अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला Section 301 Investigation के तहत लिया गया है, जिसमें जबरन श्रम (Forced Labour) से जुड़े उत्पादों पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, पहले भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, जिसे घटाकर 10% कर दिया गया है।
यह नया शुल्क भारत के साथ-साथ 60 देशों पर लागू किया गया है और इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है।
क्यों लगाया गया 10% टैरिफ?
अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि जिन देशों में जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है, उन पर यह टैरिफ लगाया गया है।
अमेरिका का दावा है कि यह कदम मानवाधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
किन देशों के बराबर पहुंचा भारत?
10% टैरिफ के साथ भारत को पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत कई एशियाई और लैटिन अमेरिकी देशों की श्रेणी में रखा गया है।
यह टैरिफ उन 60 देशों पर लागू किया गया है, जिनका अमेरिका के कुल आयात में 99% से अधिक हिस्सा है।
क्या है Section 301 Investigation?
Section 301 अमेरिकी व्यापार कानून का एक प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिका किसी देश पर अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक गतिविधियों का आरोप लगने पर अतिरिक्त शुल्क या अन्य व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है।
भारत पर फिलहाल दो अलग-अलग Section 301 जांच चल रही हैं। पहली जबरन श्रम से जुड़े मामलों पर है, जबकि दूसरी कथित अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता (Excess Manufacturing Capacity) को लेकर जारी है।
भारत को कैसे मिली राहत?
शुरुआत में अमेरिका ने भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया था। सार्वजनिक परामर्श के दौरान भारत सरकार और उद्योग संगठनों ने अपने पक्ष में कई तर्क दिए और बताया कि देश में जबरन श्रम रोकने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
इसके बाद अंतिम फैसला लेते हुए टैरिफ को घटाकर 10% कर दिया गया।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
दोनों देशों के बीच टैरिफ में कमी, बाजार पहुंच बढ़ाने और व्यापार सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा जारी है। हालांकि, नए टैरिफ से इन वार्ताओं पर कुछ असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की क्या चिंता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उस पर दो अलग-अलग Section 301 जांच चल रही हैं, जबकि कुछ प्रतिस्पर्धी देशों पर केवल एक जांच है।
यदि भविष्य में उन देशों पर कुल टैरिफ भारत से कम रहता है, तो भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रभावित हो सकती है।
आगे क्या होगा?
भारत सरकार और अमेरिकी प्रशासन के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों देश टैरिफ, बाजार पहुंच और व्यापारिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे भी चर्चा करेंगे। फिलहाल भारत को 12.5% के बजाय 10% टैरिफ मिलने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निर्यात क्षेत्र पर इसका प्रभाव आने वाले महीनों में साफ होगा।




