कॉमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा: आम आदमी को राहत, कारोबार पर बढ़ेगा बोझ

भारत में एक बार फिर ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में भारी बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर पड़ने वाला है।
कॉमर्शियल LPG सिलेंडर में भारी बढ़ोतरी
सरकार ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में औसतन 993 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 3071.50 रुपये हो गई है। वहीं मुंबई में यह 3024 रुपये तक पहुंच गई है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है।
घरेलू LPG कीमतों में कोई बदलाव नहीं
जहां कॉमर्शियल गैस महंगी हुई है, वहीं घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
सरकार का यह फैसला महंगाई को नियंत्रित रखने और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न डालने की रणनीति के तहत लिया गया माना जा रहा है।
तीन बार बढ़ चुकी हैं कीमतें
गौर करने वाली बात यह है कि फरवरी के बाद से अब तक कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी हो चुकी है।
- मार्च में पहली बढ़ोतरी
- अप्रैल की शुरुआत में दूसरी
- अब मई में तीसरी बड़ी बढ़ोतरी
इस लगातार वृद्धि ने व्यवसायों की लागत को काफी बढ़ा दिया है।
रेस्टोरेंट और कारोबार पर असर
कॉमर्शियल LPG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर रेस्टोरेंट, ढाबों और फूड इंडस्ट्री पर पड़ेगा। इन व्यवसायों में गैस का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत का बोझ ग्राहक पर डाला जा सकता है, जिससे बाहर खाना और फूड डिलीवरी महंगी हो सकती है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर
सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। यह फैसला भी महंगाई को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
हालांकि तेल कंपनियों पर इसका दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि उन्हें महंगे कच्चे तेल के बावजूद कीमतें स्थिर रखनी पड़ रही हैं।
LPG बुकिंग के नए नियम लागू
1 मई से LPG बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है।
- अब शहरों में 25 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक किया जा सकेगा (पहले 21 दिन)
- ग्रामीण क्षेत्रों में यह सीमा 45 दिन तक हो सकती है
- OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम (DAC) अनिवार्य किया गया है
इन बदलावों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना है।
सरकार और तेल कंपनियों के बीच संतुलन की चुनौती
सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह एक तरफ आम जनता को राहत देना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ तेल कंपनियों के घाटे को भी संभालना है।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में भी बदलाव संभव है।





