दिल्ली-NCR में फिर महंगी हुई CNG, दो दिन में दूसरी बार बढ़े दाम
दिल्ली-NCR में CNG एक बार फिर महंगी हो गई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने शनिवार सुबह से CNG की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है। पिछले दो दिनों में यह दूसरी बार है जब CNG के दाम बढ़ाए गए हैं।
नई कीमतों के बाद दिल्ली में अब CNG 80.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं नोएडा और गाजियाबाद में इसकी कीमत 88.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।
किन शहरों में कितनी हुई बढ़ोतरी
नई दरों के अनुसार गुरुग्राम में CNG 85.12 रुपये प्रति किलो बिक रही है। वहीं मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली में कीमत 88.58 रुपये प्रति किलो हो गई है।
इसके अलावा कानपुर में CNG 91.42 रुपये प्रति किलो और अजमेर में 89.44 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।
कंपनी ने क्या वजह बताई
IGL का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण दाम बढ़ाने पड़े हैं।
कंपनी के मुताबिक नई कीमतों के बाद भी CNG, पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सस्ता विकल्प बनी हुई है और इससे वाहन चालकों को खर्च में बचत होती है।
ईरान युद्ध का दिख रहा असर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।
दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने से तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
इसी वजह से भारत में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
ऑटो और कैब किराया बढ़ने की आशंका
CNG के दाम बढ़ने का सीधा असर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पड़ सकता है। दिल्ली-NCR में बड़ी संख्या में ऑटो और कैब CNG पर चलते हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में किराया बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मुंबई में पहले ही ऑटो यूनियन किराया बढ़ाने की मांग कर चुके हैं।
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के कारण कंपनियां महंगा तेल खरीद रही हैं, लेकिन लंबे समय तक उसका पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला गया।
हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों तक पहुंचने लगा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने की थी ईंधन बचाने की अपील
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन बचाने और जरूरत पड़ने पर घर से काम करने की अपील की थी।
सरकार का मानना है कि ईंधन की खपत कम होने से कच्चे तेल के आयात पर दबाव घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।





