भोजशाला पर बड़ा फैसला: MP हाई कोर्ट ने कहा यह मंदिर, मस्जिद के लिए दूसरी जगह तलाशें

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि भोजशाला एक मंदिर है, जो देवी सरस्वती को समर्पित था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए दूसरी जगह तलाशने की बात कही गई है।
यह फैसला जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।
ASI रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों पर भरोसा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह निर्णय पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है। अदालत ने ASI की सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेज और सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले में तय सिद्धांतों का भी हवाला दिया।
कोर्ट के अनुसार, भोजशाला प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा का बड़ा केंद्र था और वहां देवी सरस्वती का मंदिर मौजूद था।
क्या था ASI सर्वे में दावा?
ASI ने 2024 में भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया था। करीब 2200 पन्नों की रिपोर्ट में दावा किया गया कि मौजूदा ढांचे में पुराने मंदिरों के अवशेष इस्तेमाल किए गए थे और मस्जिद का निर्माण बाद में हुआ।
हिंदू पक्ष ने कोर्ट में कहा कि यह मूल रूप से वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष ने इसे मस्जिद बताया और ASI सर्वे को पक्षपातपूर्ण करार दिया।
मुस्लिम पक्ष ने क्या दलील दी?
मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने कहा कि सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी। उन्होंने कार्बन डेटिंग नहीं होने, वीडियो रिकॉर्डिंग पर सवाल और कुछ पुरातात्विक चीजों को रिपोर्ट में शामिल नहीं करने का आरोप लगाया।
साथ ही कहा गया कि वहां किसी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा साबित नहीं हुई है, इसलिए इसे मंदिर नहीं माना जा सकता।
2003 से लागू थी पूजा-नमाज व्यवस्था
ASI की 2003 की व्यवस्था के तहत भोजशाला में मंगलवार को हिंदू पूजा करते थे, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति थी। हिंदू पक्ष ने कोर्ट में याचिका दायर कर परिसर में विशेष पूजा अधिकार की मांग की थी।
अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस विवाद को लेकर नई कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।





