
बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से सुरक्षा में एक बड़ी चूक का मामला सामने आया है। यहाँ एक आजीवन कारावास की सजा काट रहा कैदी फर्जी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल करके 8 साल पहले जेल से बाहर निकल गया था। अब जेल प्रशासन ने इस जालसाजी का पर्दाफाश होने के बाद आरोपी और उसके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
आरोपी शंकर ए को 2001 में अपहरण के लिए फिरौती मांगने के मामले में दोषी ठहराया गया था। उसे आईपीसी की धारा 364A और 120B के तहत दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जेल अधिकारियों को दिसंबर 2018 में एक पत्र मिला, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक आदेश मान लिया। इस कथित फर्जी आदेश के आधार पर, शंकर ने 10,000 रुपये का जुर्माना भरा और 13 नवंबर 2018 को जेल से रिहा हो गया।
कैसे पकड़ी गई यह जालसाजी?
सालों बाद जब शिकायतें सामने आईं कि शंकर ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी रिहाई हासिल की है, तो हड़कंप मच गया। कर्नाटक के जेल और सुधार सेवाओं के महानिदेशक के निर्देश पर आंतरिक जांच शुरू की गई। जेल विभाग ने सच्चाई जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सहायक रजिस्ट्रार से संपर्क किया। शीर्ष अदालत ने पुष्टि की कि 3 नवंबर 2018 का वह आदेश पूरी तरह से फर्जी था।
जेल अधिकारियों का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने और जमा करने में कई अन्य लोगों ने शंकर की मदद की होगी। फिलहाल, पुलिस अब आरोपी को फिर से गिरफ्तार करने और इस साजिश में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की कोशिश कर रही है। यह मामला जेल प्रणाली में सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।





