कारगिल युद्ध से जुड़े 5 दिलचस्प और अनसुने तथ्य, जो हर भारतीय को जरूर जानने चाहिए
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान कई ऐसी बातें हुईं, जो भारतीय सेना के अदम्य साहस और युद्धकौशल की मिसाल हैं। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक संघर्ष से जुड़े 5 रोचक तथ्य।

हर साल 26 जुलाई को देश कारगिल विजय दिवस मनाता है। 1999 में लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर लड़े गए इस युद्ध में भारतीय सेना ने दुश्मनों को धूल चटाकर तिरंगा फहराया था। यह युद्ध जितना कठिन था, इससे जुड़े किस्से उतने ही प्रेरणादायक हैं। आइए जानते हैं कारगिल युद्ध से जुड़े 5 ऐसे दिलचस्प तथ्य, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
1. ऑपरेशन सफेद सागर (Operation Safed Sagar)
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने थल सेना के साथ मिलकर ऐतिहासिक पराक्रम दिखाया था। अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण मिग और अन्य लड़ाकू विमानों को लगभग 30,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरनी पड़ी थी। यह सैन्य इतिहास में अपनी तरह का एक बेहद जोखिम भरा और अनोखा हवाई अभियान था।
2. बिना आधुनिक तकनीक और GPS के चढ़ाई
आज के दौर में युद्ध के मैदान में नेविगेशन के लिए जीपीएस और हाई-टेक उपकरणों का इस्तेमाल होता है। लेकिन 1999 में हमारे वीर जवानों ने बिना किसी आधुनिक तकनीक के, केवल अपने अदम्य साहस, शारीरिक क्षमता और पारंपरिक नक्शों के भरोसे खड़ी और बर्फीली पहाड़ियों पर चढ़ाई करके दुश्मनों को खदेड़ा था।
3. दुनिया का सबसे लंबा हाई-एल्टीट्यूड युद्ध
कारगिल का युद्ध दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्रों में से एक में लड़ा गया था। यह संघर्ष लगभग दो महीने (मई से जुलाई 1999) तक चला। इस दौरान हमारे सैनिकों को शून्य से नीचे (Minus Temperature) के कड़ाके की ठंड और बर्फीले तूफानों जैसी बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था।
4. पॉइंट 4875 पर विजय और ‘शेरशाह’ का पराक्रम
द्रास सेक्टर में स्थित ‘पॉइंट 4875’ (जिसे अब बत्रा टॉप भी कहा जाता है) पर कब्जा करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। कैप्टन विक्रम बत्रा (शेरशाह) ने इस चोटी को दुश्मनों के चंगुल से मुक्त कराते हुए ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। जीत के बाद उनका प्रसिद्ध कोडनेम ‘ये दिल मांगे मोर!’आज भी हर भारतीय के जेहन में अमर है।
5. भारत का पहला मीडिया-कवर युद्ध
कारगिल युद्ध भारत का पहला ऐसा युद्ध था जिसे टेलीविजन और समाचार चैनलों के माध्यम से सीधे देश के घरों तक पहुंचाया गया था। इस युद्ध ने पहली बार आम नागरिकों को युद्ध के मैदान की जमीनी हकीकत और सैनिकों के बलिदान से सीधे तौर पर जोड़ा, जिससे पूरे देश में देशभक्ति की एक अभूतपूर्व लहर दौड़ गई थी।





