धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जश्न, CJP नेता अभिजीत डिपके बोले- ‘यह लोकतंत्र की जीत है’
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने इसे जनता और छात्रों के संघर्ष की बड़ी जीत बताया है।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को जोरदार जश्न मनाया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने इस घटनाक्रम को “लोकतंत्र की जीत” करार दिया है। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के खिलाफ छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन ने ही सरकार को झुकने पर मजबूर किया है।
जनशक्ति और लोकतंत्र की ताकत
विरोध स्थल पर सैकड़ों समर्थकों को संबोधित करते हुए डिपके ने कहा कि यह इस्तीफा सामूहिक कार्रवाई और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रतिरोध की ताकत को दिखाता है। मुख्य मंच से बोलते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आंदोलन ने साबित कर दिया है कि आम नागरिक सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह ठहरा सकते हैं।
DEMOCRACY WINS! 🇮🇳🇮🇳🇮🇳 pic.twitter.com/HpCaqBkPxc
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 25, 2026
अभी खत्म नहीं हुआ आंदोलन: दो और बड़ी मांगें
डिपके ने स्पष्ट किया कि मंत्री का जाना आंदोलन के उद्देश्यों में से सिर्फ एक हिस्सा था। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार दो और प्रमुख मांगों को पूरा नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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एक करोड़ रुपये का मुआवजा: नीट विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए।
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पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई: 20 तारीख को प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए।
छात्रों को दी श्रद्धांजलि और इस्तीफा पत्र की मुख्य बातें
अपने भाषण के दौरान, डिपके ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों को याद किया और उनकी याद में दो मिनट का मौन रखने की अपील की।
दूसरी ओर, धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे पत्र में कहा कि उन्होंने छात्रों के हित में और यह सुनिश्चित करने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है कि “राष्ट्रविरोधी ताकतें” इस स्थिति का फायदा न उठा सकें। उन्होंने कहा कि यह फैसला निजी प्रतिष्ठा का मामला नहीं है और पिछले 10 दिनों की घटनाओं से वे बेहद दुखी हैं।





