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अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत की नजर, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे दोनों देश

भारत ने कहा है कि वह अमेरिका द्वारा प्रस्तावित नए टैरिफ (आयात शुल्क) के मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहा है। इसी बीच दोनों देश व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने कुछ देशों पर नए टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उन देशों की जांच के बाद सामने आया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

सरकारी जानकारी के अनुसार, ये टैरिफ अभी अंतिम नहीं हैं। इन्हें लागू करने से पहले सार्वजनिक परामर्श और समीक्षा की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। USTR सभी सुझावों और टिप्पणियों पर विचार करने के बाद अंतिम फैसला करेगा। प्रस्ताव के तहत भारत सहित कुछ देशों पर 12.5 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है। वहीं कनाडा, मैक्सिको, ताइवान और ब्रिटेन जैसे देशों के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है।

भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड उन देशों में शामिल हैं, जिन पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने का सुझाव दिया गया है। हालांकि फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है और इसे लागू करने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

सरकार ने बताया कि कुछ ऐसे उत्पाद, जो पहले से सेक्शन 232 के तहत टैरिफ के दायरे में हैं, उन्हें इस नए प्रस्ताव से बाहर रखा गया है। इसके अलावा कपड़ा और परिधान (टेक्सटाइल और अपैरल) उत्पादों के लिए विशेष व्यवस्था का भी प्रस्ताव है, जिसके तहत कुछ देशों से सीमित मात्रा में आयात पर कम शुल्क लगाया जा सकता है।

अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत यह जांच शुरू की थी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या व्यापारिक साझेदार देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं और क्या इसका असर अमेरिकी कारोबार पर पड़ रहा है।

इसी बीच भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी बातचीत जारी है। दोनों देश फरवरी 2026 में घोषित रूपरेखा समझौते के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं।

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है और दोनों पक्ष बचे हुए मुद्दों को सुलझाने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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