भारत

3.6 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी: 114 राफेल, मिसाइलें और हाई-टेक निगरानी सिस्टम खरीदेगा भारत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में गुरुवार को करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये के बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी दी गई। इनमें 114 राफेल लड़ाकू विमान, उन्नत कॉम्बैट मिसाइलें और एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (AS-HAPS) जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां शामिल हैं।

परिषद ने इन परियोजनाओं के लिए ‘स्वीकृति की आवश्यकता’ (AoN) प्रदान की है। मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के तहत 114 राफेल विमानों की खरीद से भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा। इससे वायुसेना को हर तरह के युद्ध हालात में एयर सुपरियोरिटी हासिल करने और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, इन विमानों का अधिकांश निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

उन्नत कॉम्बैट मिसाइलों की खरीद से वायुसेना की स्टैंड-ऑफ अटैक क्षमता मजबूत होगी। यानी दुश्मन की सीमा में घुसे बिना दूर से ही सटीक और गहरे हमले किए जा सकेंगे। वहीं AS-HAPS सिस्टम को लंबी अवधि की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, सुरक्षित संचार और सैन्य उपयोग के लिए रिमोट सेंसिंग जैसे कार्यों में तैनात किया जाएगा।

हालिया सैन्य अभियानों, जिनमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी शामिल है, ने यह साबित किया है कि 4.5 पीढ़ी के राफेल विमान आक्रामक अभियानों में बेहद कारगर हैं। राफेल में मीटियोर और स्कैल्प जैसी अत्याधुनिक मिसाइलें और लेजर-गाइडेड बम लगे हैं, जो इसे और घातक बनाते हैं।

वायुसेना के लिए यह खरीद इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी फाइटर जेट ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) अभी विकास के चरण में है और उसे आने में समय लगेगा। वहीं HAL का तेजस Mk-1A कार्यक्रम भी अमेरिकी कंपनी GE से इंजन सप्लाई में देरी के कारण प्रभावित हुआ है।

भारतीय सेना के लिए भी कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। सेना ‘विभव’ एंटी-टैंक माइंस खरीदेगी, जिन्हें दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों की रफ्तार रोकने के लिए तैनात किया जाएगा। इसके अलावा आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल (ARV), टी-72 टैंक और BMP-II इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल के ओवरहॉल को भी मंजूरी दी गई है। इससे इन प्लेटफॉर्म्स की सेवा अवधि बढ़ेगी और उनकी युद्ध क्षमता बेहतर होगी।

कुल मिलाकर, इन फैसलों से भारत की थल, जल और वायु सेनाओं की ताकत में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है, साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा निर्माण को भी मजबूती मिलेगी।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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