प्रधानमंत्री मोदी का मलेशिया दौरा: व्यापार, सुरक्षा, संस्कृति और टेक्नोलॉजी में सहयोग को नई गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मलेशिया दौरे के दौरान कुआलालंपुर से विदेश मंत्रालय ने प्रेस वार्ता की। इस मौके पर विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) पी. कुमारन ने बताया कि यह यात्रा खास है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी लगभग दस साल बाद आधिकारिक रूप से मलेशिया पहुंचे हैं। इससे पहले उनकी आखिरी यात्रा 2015 में हुई थी।
पी. कुमारन ने कहा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत-मलेशिया साझेदारी के सभी अहम क्षेत्रों की समीक्षा की। इसमें व्यापार और निवेश के साथ-साथ रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी, संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय शामिल रहे।
भारत-मलेशिया के बीच कई अहम समझौते
इस दौरान भारत और मलेशिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें ऑडियो-विजुअल सह-निर्माण, आपदा प्रबंधन, भ्रष्टाचार से निपटने, संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में साझेदारी और स्वास्थ्य व चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग शामिल हैं।
इसके अलावा तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा (टीवीईटी), सुरक्षा सहयोग, सामाजिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट्स एलायंस जैसे क्षेत्रों में भी समझौते हुए। 10वें मलेशिया-भारत सीईओ फोरम की रिपोर्ट भी इस दौरान प्रस्तुत की गई।
कई बड़ी घोषणाएं भी हुईं
दोनों देशों ने भविष्य को देखते हुए कई अहम घोषणाएं कीं। मलेशिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने का फैसला लिया गया। कुआलालंपुर स्थित यूनिवर्सिटी मलाया में एक समर्पित तिरुवल्लुवर सेंटर स्थापित किया जाएगा और मलेशियाई नागरिकों के लिए तिरुवल्लुवर छात्रवृत्ति की शुरुआत होगी।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एनआईपीएल और पेनेट एसडीएन बीएचडी के बीच सीमा पार भुगतान समझौता किया गया। इसके अलावा साइबरजाया विश्वविद्यालय और भारत के आयुर्वेद प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के बीच शैक्षणिक सहयोग पर भी सहमति बनी।
भारतीय समुदाय से सीधा संवाद
प्रधानमंत्री मोदी के कुआलालंपुर पहुंचने पर उनका भव्य सांस्कृतिक स्वागत किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री ने एमआईएनईएस इंटरनेशनल एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में भारतीय समुदाय को संबोधित किया।
इस कार्यक्रम में मलेशिया में भारतीय समुदाय के इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी लगी और करीब 800 स्थानीय कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। एक ही मंच पर इतने कलाकारों द्वारा भारतीय नृत्य प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड मलेशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
शिक्षा, संस्कृति और प्रवासी भारतीयों पर खास जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रवासी भारतीयों को भारत-मलेशिया संबंधों का ‘जीवंत सेतु’ बताया। दोनों देशों के बीच करीब 29 लाख भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं। 2025 में लगभग 14 लाख भारतीय पर्यटक मलेशिया पहुंचे, जबकि करीब 3 लाख मलेशियाई पर्यटकों ने भारत की यात्रा की। इससे मलेशिया आसियान क्षेत्र से भारत आने वाले पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।
रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद पर सख्त रुख
दोनों प्रधानमंत्रियों ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त अभ्यास लगातार हो रहे हैं। रक्षा उद्योग में भी सहयोग बढ़ रहा है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सहित कई भारतीय कंपनियां मलेशिया में सक्रिय हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि आतंक के खिलाफ किसी तरह का समझौता नहीं होगा और दोहरे मानदंड स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस दिशा में संयुक्त कार्य समूह और सुरक्षा संवाद जारी रहेंगे।
डिजिटल भुगतान और कनेक्टिविटी को बढ़ावा
विदेश मंत्रालय के सचिव ने बताया कि दोनों देश क्रॉस-बॉर्डर क्यूआर आधारित भुगतान और यूपीआई लिंक पर तेजी से काम कर रहे हैं। इससे पर्यटकों, कामगारों और व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। हवाई संपर्क बढ़ाने और नए उड़ान मार्ग खोलने पर भी सहमति बनी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान के साथ सहयोग, भारत की एक्ट ईस्ट नीति, इंडो-पैसिफिक विजन और ब्रिक्स में मलेशिया की भूमिका का भी जिक्र किया और भविष्य में भारत-मलेशिया संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।





