विदेश

नासा के अंतरिक्ष यात्री जॉनी किम की आठ महीनों बाद सफलतापूर्वक धरती पर वापसी

नासा के अंतरिक्ष यात्री जॉनी किम आखिरकार आठ महीने बाद धरती पर वापस आ गए। उनके साथ रूसी कॉस्मोनॉट सर्गेई रिझिकोव और एलेक्सी जुब्रित्स्की भी लौटे। तीनों ने अंतरिक्ष में एक लंबा और महत्वपूर्ण मिशन पूरा किया, जिसमें विज्ञान और नई तकनीकों पर काम शामिल था। इस दौरान उन्होंने धरती पर जीवन को बेहतर बनाने और भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए रास्ता तैयार करने वाली कई रिसर्च कीं।

सोयूज़ MS-27 अंतरिक्ष यान की वापसी योजना के मुताबिक हुई। पैराशूट के सहारे कैप्सूल कजाखस्तान के द्झेज़काज़गान के दक्षिण-पूर्वी इलाके में सुरक्षित उतरा। लैंडिंग के तुरंत बाद रेस्क्यू टीमें वहां पहुंच गईं और क्रू को बाहर निकालने में मदद की। आठ महीने की माइक्रोग्रैविटी के बाद शरीर पर असर पड़ना तय है, इसलिए डॉक्टरों ने तुरंत उनका मेडिकल चेकअप शुरू किया।

यह कोई छोटा मिशन नहीं था। 245 दिनों में इस टीम ने धरती के चारों ओर 3,920 चक्कर लगाए और लगभग 104 मिलियन मील की दूरी तय की। जॉनी किम और एलेक्सी जुब्रित्स्की के लिए यह पहला अंतरिक्ष सफर था, जबकि सर्गेई रिझिकोव के लिए यह तीसरा मिशन था। रिझिकोव ने कुल मिलाकर अब तक 603 दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं।

अंतरिक्ष जीवन बेहद अनुशासन वाला होता है। वैज्ञानिक प्रयोग, स्टेशन की देखरेख, रोज़ाना एक्सरसाइज़ और लगातार ट्रेनिंग — यही उनकी दिनचर्या रही। किम ने कई महत्वपूर्ण प्रयोगों में हिस्सा लिया। उन्होंने माइक्रोग्रैविटी में रक्त वाहिकाओं वाले बायोप्रिंटेड टिश्यू पर शोध किया। यह तकनीक भविष्य में लंबी अंतरिक्ष यात्राओं पर मेडिकल इलाज में मदद कर सकती है। उन्होंने सतह अवतार (Surface Avatar) प्रयोग में भी हिस्सा लिया, जिसमें अंतरिक्ष से रोबोट्स को नियंत्रित किया गया। भविष्य के चांद या मंगल मिशनों में ऐसे रोबोट खतरनाक काम संभाल सकते हैं।

इसके अलावा, किम ने डीएनए जैसी नैनोमटीरियल बनाने पर भी काम किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन प्रयोगों से नई दवाइयों और इलाज के तरीके विकसित हो सकते हैं। लैंडिंग के बाद टीम को करागांडा ले जाया गया, जहां उन्हें और मेडिकल चेकअप और आराम मिलेगा। इसके बाद जॉनी किम ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर जाएंगे, जहां विशेषज्ञ उन्हें धरती की ग्रैविटी के अनुकूल होने में मदद करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अब 25 साल से ज्यादा हो गए हैं और यह मानव इतिहास की सबसे अहम वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में से एक बन चुका है। यहां किए गए प्रयोग लगातार बायोलॉजी, फिजिक्स, मेडिसिन और मटीरियल साइंस की सीमाएं आगे बढ़ा रहे हैं और हमें यह समझने में मदद कर रहे हैं कि अंतरिक्ष में इंसानों को सुरक्षित और स्वस्थ कैसे रखा जाए।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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