दिल्ली में घना स्मॉग, AQI 392 पहुंचा; सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगी रिपोर्ट
दिल्ली बुधवार सुबह खतरनाक स्मॉग की मोटी परत में ढकी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक सुबह 9 बजे राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 392 दर्ज हुआ, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है।
मंगलवार को भी स्थिति चिंताजनक थी, जब सुबह 7 बजे AQI 341 था और दोपहर बाद बढ़कर 374 पहुंच गया।
दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में घने धुएं जैसी धुंध छाई रही, जिससे लोगों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई। IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर AQI 342 दर्ज किया गया।
CPCB के अनुसार AQI श्रेणी इस प्रकार है—
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0–50: अच्छा
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51–100: संतोषजनक
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101–200: मध्यम
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201–300: खराब
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301–400: बहुत खराब
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401–500: गंभीर
दिल्ली के अलावा अन्य बड़े शहरों में सुबह 9 बजे AQI इस प्रकार रहा—
अहमदाबाद 168, बेंगलुरु 76, चेन्नई 94, जयपुर 188, हैदराबाद 121, पटना 130, पुणे 185, लखनऊ 166 और मुंबई 162।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगी सफाई
बढ़ते प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार को यह बताने के लिए कहा कि AQI मापने के लिए किस तरह के उपकरण इस्तेमाल किए जा रहे हैं और वे कितने प्रभावी हैं। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने निर्देश दिया,“दिल्ली सरकार उपकरणों के प्रकार और उनकी क्षमता पर एक हलफनामा दाखिल करे।”
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि कुछ जगहों पर प्रदूषण मापने वाले स्टेशनों के पास पानी का छिड़काव किया गया, जिससे AQI रीडिंग कृत्रिम रूप से बेहतर दिख सकती है। उन्होंने इसके समर्थन में समाचार रिपोर्ट भी पेश कीं।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पूरे शहर में पानी का छिड़काव चल रहा है, लेकिन राजनीतिक दल इसे लेकर गलत वीडियो फैला रहे हैं। सिंह ने यह भी कहा कि पराली जलाने की घटनाओं की सही गिनती नहीं हो रही है और किसानों को अवशेष निपटान के उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दीर्घकालिक योजना तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि हर साल होने वाले प्रदूषण संकट को रोका जा सके। इसके साथ ही पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों को भी आदेश दिया गया कि वे 13 नवंबर को CAQM द्वारा जारी पराली रोकने के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
यह खराब हवा दिल्ली-एनसीआर के लिए एक बार फिर गंभीर स्वास्थ्य खतरा बनकर सामने आई है, और सभी की नजर अब सरकारों और एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर है।





