Digital Arrest Scam: 18 दिन तक घर में कैद रही महिला, साइबर ठगों ने 18 लाख रुपये की बचत उड़ाई

Digital Arrest Scam : तमिलनाडु के कोयंबटूर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 58 वर्षीय एक महिला को कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने 18 दिनों तक फर्जी “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 18 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर महिला को डराया और उसके बैंक खाते से पूरी बचत निकलवा ली।
कैसे शुरू हुई ठगी?
पुलिस के अनुसार, पीड़िता वडावल्ली क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पति, जो एक बैंक अधिकारी थे, कोविड-19 महामारी के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद वह अपनी बेटी के साथ चेन्नई में रह रही थीं। हाल ही में वह कोयंबटूर स्थित अपने घर आई थीं और अकेली रह रही थीं।
25 अप्रैल को उन्हें एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके बैंक खाते के माध्यम से आतंकवादी संगठनों से जुड़े 2.5 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर किया मानसिक उत्पीड़न
कॉल करने वाले ने महिला को बताया कि वह “डिजिटल अरेस्ट” में हैं और उन्हें घर से बाहर निकलने या किसी से संपर्क करने की अनुमति नहीं है। ठगों ने यह भी दावा किया कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उनकी निगरानी कर रहे हैं और यदि उन्होंने किसी से बात की या घर से बाहर कदम रखा तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई के डर से महिला लगभग 18 दिनों तक घर में ही बंद रहीं और बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ लिया।
पूरी बचत ठगों के खाते में ट्रांसफर करवाई
लगातार मानसिक दबाव बनाने के बाद साइबर अपराधियों ने महिला से उनकी वित्तीय जानकारी मांगी। महिला ने बताया कि उनके पास करीब 18 लाख रुपये की बचत है।
इसके बाद ठगों ने उन्हें कहा कि सरकार की जांच और ऑडिट प्रक्रिया के लिए यह राशि एक निर्दिष्ट बैंक खाते में जमा करनी होगी। साथ ही आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा।
महिला ने उनकी बातों पर भरोसा करते हुए दो अलग-अलग लेन-देन में पूरे 18 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
एक सप्ताह बाद खुला ठगी का राज
जब एक सप्ताह बाद भी पैसे वापस नहीं मिले तो महिला को संदेह हुआ। जांच करने पर उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गई हैं।
पुलिस के अनुसार, यह रकम उनके पति की मृत्यु के बाद प्राप्त सेवानिवृत्ति और अन्य लाभों की बची हुई राशि थी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
महिला ने कोयंबटूर सिटी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान करने और ठगी गई रकम वापस दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम?
हाल के वर्षों में “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी का एक नया तरीका बनकर उभरा है। इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे फर्जी केस, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाकर पीड़ितों पर मानसिक दबाव बनाते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह
- किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं देती।
- संदिग्ध कॉल मिलने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
- डर या दबाव में आकर वित्तीय लेन-देन न करें।





