India-US Trade: अमेरिका के 12.5% टैरिफ प्रस्ताव का भारत ने किया विरोध, कहा- व्यापारिक विवाद बातचीत से सुलझें

India-US Trade News: भारत ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का कड़ा विरोध किया है। भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade Negotiations) के जरिए होना चाहिए, न कि एकतरफा कदमों से। भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) से इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने Section 301 Investigation के तहत उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिन पर जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं करने का आरोप है।
इस प्रस्ताव के तहत भारत समेत 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही गई है। हालांकि, यह अभी केवल प्रस्ताव है और इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
भारत ने क्या कहा?
वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने सार्वजनिक सुनवाई में कहा कि भारत जबरन श्रम को समाप्त करने के लिए संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के तहत गंभीरता से काम करता है।
उन्होंने कहा कि USTR की रिपोर्ट में भारत के खिलाफ पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं हैं। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि भारत की नीतियों से अमेरिकी उद्योग को किस प्रकार वास्तविक नुकसान हुआ है।
भारत ने यह भी कहा कि केवल आयात प्रतिबंध न होने के आधार पर पूरे देश पर टैरिफ लगाना उचित नहीं है।
द्विपक्षीय बातचीत पर दिया जोर
भारत ने अमेरिका से कहा कि यदि कोई व्यापारिक चिंता है तो उसका समाधान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत बातचीत और परामर्श से किया जाना चाहिए।
सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत रचनात्मक संवाद के लिए तैयार है, लेकिन एकतरफा टैरिफ उचित समाधान नहीं है।
APEDA ने चावल को लेकर क्या कहा?
APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) ने भी अमेरिकी दावों का विरोध किया।
भारत ने कहा कि देश में चावल का आयात बहुत सीमित मात्रा में होता है और वह केवल विशेष किस्मों की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले चावल पर सख्त निगरानी और नियामकीय जांच होती है।
APEDA ने भारतीय चावल को प्रस्तावित टैरिफ से छूट देने की मांग भी की।
उद्योग संगठनों ने भी जताई चिंता
FICCI और CII ने भी प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क पर चिंता जताई है।
दोनों उद्योग संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त टैरिफ से भारतीय निर्यातकों के साथ-साथ अमेरिकी आयातकों, कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इससे दोनों देशों के बीच मजबूत सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है।
अभी अंतिम फैसला नहीं
USTR ने मार्च 2026 में यह जांच शुरू की थी और जून में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की। अब सार्वजनिक टिप्पणियों और सुनवाई के बाद अमेरिकी प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा।
भारत ने उम्मीद जताई है कि उसकी आपत्तियों और तथ्यों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा व्यापारिक मुद्दों का समाधान आपसी सहयोग और बातचीत के जरिए निकाला जाएगा।





