मिग-21 को दी गई भावुक विदाई, चंडीगढ़ एयरबेस पर हुआ अंतिम कार्यक्रम

भारतीय वायुसेना के सबसे पुराने और भरोसेमंद लड़ाकू विमान मिग-21 को आज चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर एक भावुक समारोह के साथ आधिकारिक रूप से विदाई दी गई। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह और कई पूर्व व वर्तमान वायुसेना अधिकारी मौजूद रहे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मिग-21 सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि भारत-रूस के मजबूत रिश्तों का प्रतीक रहा है। उन्होंने इसे “बर्ड ऑफ ऑल सीजन” बताया और कहा कि मिग-21 ने हर परिस्थिति में खुद को साबित किया है। थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने भी मिग-21 की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि यह विमान वायुसेना की ताकत का आधार रहा और इसकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
#WATCH | Chandigarh: Defence Minister Rajnath Singh says, “MiG 21 is not merely an aircraft, it is a testimony of India-Russia relations.” pic.twitter.com/zRsuTXS39w
— ANI (@ANI) September 26, 2025
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने मिग-21 के टेल नंबर 2777 के साथ अपनी आखिरी उड़ान भरी और एयरबेस पर सफलतापूर्वक लैंड किया। कुल छह मिग-21 विमानों ने आकाश में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा ने भी आखिरी बार मिग उड़ाया। बादल 3 और पैंथर फॉर्मेशन में विमानों ने आसमान में करतब दिखाए। सूर्य किरण एरोबेटिक टीम ने भी शानदार प्रदर्शन कर मिग को आखिरी सलाम दिया। कार्यक्रम के अंत में मिग-21 को पानी की बौछार के साथ विदाई दी गई, जो कि सैन्य परंपरा का हिस्सा है।
मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर वायुसेना प्रमुख को एक बड़ी किताब “फॉर्म-700” के रूप में सौंपेंगे। इसमें मिग-21 के उड़ान से पहले की जांच रिपोर्ट, उड़ान के बाद पायलटों की फीडबैक, और अन्य तकनीकी जानकारियां दर्ज होंगी। यह किताब मिग-21 के ऐतिहासिक सफर की याद दिलाएगी।
मिग-21 ने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों, 1999 के कारगिल युद्ध, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंधूर में अहम भूमिका निभाई थी। इसकी अधिकतम रफ्तार 2,175 किमी प्रति घंटा है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बचकर मिशन को तेजी से अंजाम देने में सक्षम था।
पूर्व विंग कमांडर राजीव बत्तीश ने कहा कि मिग-21 एक शक्तिशाली और खूबसूरत मशीन थी। “यह विमान सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि हमारी यादों और अनुभवों का हिस्सा रहा है,” उन्होंने कहा। मिग-21 की सेवा से हटने के बाद वायुसेना अब राफेल, तेजस और सुखोई जैसे आधुनिक विमानों के जरिए अपनी ताकत बढ़ा रही है।





