मानसून सत्र में कामकाज ठप, स्पीकर ने जताई कड़ी नाराजगी

संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में हो रहे हंगामे और राजनीतिक दलों के आचरण पर नाराजगी जताई। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि संसद के भीतर और बाहर अपनी भाषा और बर्ताव में गरिमा बनाए रखें। बिरला ने कहा कि लोकतंत्र की मूल भावना यह है कि मुद्दों पर चर्चा हो और समाधान निकले, लेकिन इस सत्र में ऐसा नहीं हुआ।
लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका आचरण लोकतंत्र के मूल्यों के अनुरूप नहीं रहा और यह संसद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता सब देख रही है कि किस तरह से महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा को लगातार बाधित किया जा रहा है।
ओम बिरला ने सत्र के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि इस मानसून सत्र में कुल 419 सवाल पूछे गए, लेकिन उनमें से केवल 55 सवालों के ही मौखिक उत्तर दिए जा सके। सत्र के लिए कुल 120 घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन हंगामे की वजह से सिर्फ 37 घंटे ही चर्चा हो पाई। इसके बावजूद, लोकसभा में 12 विधेयक पारित किए गए।
अध्यक्ष ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करें और संसद को विचार-विमर्श का मंच बनाए रखें, न कि हंगामे का।





