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SLBC सुरंग दुर्घटना: AquaEye उपकरण से फंसे मजदूरों की खोज में मदद

तेलंगाना में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल सुरंग (SLBC) में फंसे 8 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है। भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय टीमें पिछले 26 घंटे से अधिक समय से अथक प्रयास कर रही हैं। हालांकि, अब तक सफलता नहीं मिली है।

उत्तराखंड के ‘रैट-होल माइनर्स’ की टीम को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। यह वही विशेषज्ञ टीम है जिसने 2023 में उत्तरकाशी में सुरंग ढहने के दौरान श्रमिकों को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। ये विशेषज्ञ सीमित स्थानों में काम करने में कुशल हैं और सुरंग में फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके अलावा, आईआईटी चेन्नई की एक टीम भी पुश कैमरे और एक विशेष खदान का पता लगाने वाले रोबोट के साथ बचाव कार्य में जुटी हुई है। छह सदस्यीय टीम, जिसमें आईआईटी चेन्नई और एलएंडटी के विशेषज्ञ शामिल हैं, सुरंग के अंदर की लाइव फुटेज कैप्चर करने के लिए उपकरण संचालित कर रही है। यदि पुश कैमरे वांछित स्थान तक पहुंचने में असफल होते हैं, तो रोबोट की सहायता ली जाएगी। खोज में मदद के लिए AquaEye उपकरण का भी उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि, नौसेना की टीमें अब तक सुरंग के भीतर प्रवेश नहीं कर पाई हैं। वहीं, आपदा प्रबंधन के विशेष मुख्य सचिव अरविंद कुमार और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। इस घटना ने सुरंग सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे भविष्य की सुरंग निर्माण परियोजनाओं में उन्नत सुरक्षा उपाय अपनाने की मांग तेज हो गई है।

यह हादसा 22 फरवरी को उस समय हुआ जब कुछ मजदूर कार्य के सिलसिले में सुरंग के भीतर थे। इसी दौरान सुरंग के 13-14 किलोमीटर अंदर छत का एक हिस्सा ढह गया, जिससे 8 मजदूर भीतर ही फंस गए। इस घटना में कुछ मजदूर घायल भी हुए थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, बचाव दल पूरी तत्परता से फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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