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वो खेल जिसे खेलकर बीता बचपन… क्या अब भी जिंदा है या भुला चुके हैं लोग

दूर मुझसे हो गया बचपन, मगर मुझमें बच्चे सा मचलता कौन है… किसी ने क्या खूब लिखा है. क्या आपको भी ऐसा लगता है कि जिंदगी की भाग दौड़ में आपसे भी बचपन के कुछ पल छूट गए है, लेकिन आज के बच्चों को देखकर वर पल वापस जीने और उसे याद करने का मन करता है. अगर हां तो चलिए हमारे साथ, उन पलों को जब दोस्तों के साथ वक्त बिताया करते है, खेला करते थे.. उसे फिर से याद किया जाए.

 

इस रिपोर्ट में हम बात करेंगे कुछ ऐसे खेलों की जिन्हें आज के इस टेक्नोलॉजी की दुनिया ने अपने इलेक्ट्रॉनिक चार्म के पीछे छिपा दिया है. आज के डिजिटल युग में बच्चे या तो टीवी पर कार्टून देखते है या फिर मोबाइल पर गेम्स से उन्हें फुरसत नहीं मिलती. कई ऐसे खेल भी है जिन्हें पहले तो हम अपने दोस्तों के साथ मिलकर खेला करते थे लेकिन अब डिजिटल युग ने उन गेमों को फोन में उतार दिया है जिससे अब दोस्तों के साथ मिलकर खेलना भी मानों सपना हो.

 

छुपन छुपाई

बचपन का वह खेल जिसे शाम होते ही दोस्तों साथ खेलने का मजा ही अलग था. छुपन छुपाई, इसे हाइड एंड सीक नाम से भी जाना जाता है. इसमें एक खिलाड़ी को अपनी आंखे बंद करते हुए निर्धारित गिनती गिननी होती है. इसी दौरान वाकी खिलाड़ियों को आस-पास में छिपना होता है.

खेल की अगली कड़ी में आंखें बंद करने वाले खिलाड़ी को छिपे हुए सभी खिलाड़ियों को ढूंढना होता. अगर वह इसमें सफल होता है, तो सबसे पहले ढूंढ़े गए खिलाड़ी को अपनी आंखें बंद करनी होती है और सेम प्रक्रिया को दोहराना होता है.

पिठ्ठू 

एक के ऊपर एक पत्थरों को जमाना फिर उसे तोड़कर भागना और फिर उसे जमाना…. बेहतरीन खेलों में से एक पिठ्ठू गरम. इस खेल को खेलने के लिए एक गेंद और कुछ समतल पत्थरों की आवश्यकता होती है. इन पत्थरों को एक के ऊपर एक सजाया जाता है. फिर गेंद की मदद से पहली टीम का खिलाड़ी, इन्हें निर्धारित दूरी से गिराने की कोशिश करता है. जैसे ही वह इन पत्थरों को गिराने में सफल होता है. दूसरी टीम के खिलाड़ी उसे गेंद की मदद से चेंज करते हैं. गेंद पत्थर गिराने वाले खिलाड़ी की टीम के किसी साथी को छुए, इससे पहले उन्हें गिरे हुए समतल पत्थरों को सजाकर पिट्ठू गरम बोलना पड़ता है. अगर वह ऐसा नहीं कर पाता तो वह टीम से बाहर हो जाता है.

 

राजा, मंत्री, चोर, सिपाही

एक ऐसा खेल जिसे आज के इस डिजिटल युग के लोग बिलकुल नहीं जानते होंगे. पर 90’s के दौर का यह गेम अपने आप में बड़ा दिलचस्प है, जहा चार लोग आपस में कागज की पर्चियों से बने राजा, मंत्री, चोर, सिपाही के नामों से तय करते थे कि आखिर इन चारों में से कौन है राजा और कौन है चोर. खेल में चोर जिसे मिला वो हारा और जिसे मिला राजा उसकी जीत.

 

कंचा (गोली)

कंचा (गोली) एक परम्परागत खेल है. गांव की गलियों में इसे आज भी बच्चे खेलते हुए मिल जाते हैं. इस खेल में मार्बल्स की गोलियां बच्चों के पास होती हैं. इसमें एक गोली से दूसरी गोली को निशाना लगाना होता है और निशाना लग गया तो वह गोली आपकी हो जाती है. इसके अलावा एक गड्ढा बनाकर उसमें कुछ दूरी से कंचे फेंके जाते हैं. जिसके कंचे सबसे ज्यादा गिनती में गड्ढे में जाते हैं वह जीतता है.

 

लट्टू (स्पिनिंग टॉप)

एक वक्त था जब लट्टू (स्पिनिंग टॉप) भारत का सबसे लोकप्रीय सड़क खेल हुआ करता था. यह अभी भी उत्तर भारत के शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में खेला जाता है. लट्टू भारतीय गांवों में बच्चों के लिए जीवन का एक हिस्सा है. लट्टू एक ठोस शलजम आकार वाला लकड़ी का खिलौना है जिसके निचले भाग में एक कील निकली होती है और ऊपर से नीचे की ओर खांचे बने होते हैं. एक रस्सी को लट्टु के निचले आधे भाग के आसपास लपेटा जाता है जिससे यह स्पिन बना सकता है.

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