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20 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा अमेरिकी डॉलर, रुपया नीचे, 1 डॉलर=80.79 रु.

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नई दिल्ली: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर 20 साल के उच्चतम स्तर पर आ गया है.

 

अमेरकी डॉलर के स्तर ने भारतीय रुपए की कमर तोड़ कर रख दी है. गुरुवार को रुपया 82 पैसा गिर गया. अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें 0.75% बढ़ा दी गईं यह एक बहुत बड़ा कारण है जो रुपए में यह भारी गिरावट दर्ज की गई है.

 

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने रेपो दर में 75 आधार अंकों की वृद्धि की थी – जो उम्मीदों के अनुरूप समान परिमाण की लगातार तीसरी वृद्धि है, जिसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि निवेशक मौद्रिक नीति के बीच बेहतर और स्थिर रिटर्न के लिए अमेरिकी बाजारों की ओर बढ़ेंगे.

 

फेड ने यह भी संकेत दिया कि अधिक दरों में बढ़ोतरी आ रही है और ये दरें 2024 तक ऊंची रहेंगी. बीते कुछ वर्षों की बात करें तो दिसंबर 2012 में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 51 रुपए थी.

 

अमेरिकी केंद्रीय बैंक लंबे समय में 2% की दर से अधिकतम रोजगार और मुद्रास्फीति हासिल करना चाहता है और यह अनुमान लगाता है कि लक्ष्य सीमा में चल रही बढ़ोतरी उचित होगी. ब्याज दरें बढ़ाना एक मौद्रिक नीति साधन है जो आम तौर पर अर्थव्यवस्था में मांग को दबाने में मदद करता है, जिससे मुद्रास्फीति दर में गिरावट में मदद मिलती है.

 

अमेरिका में उपभोक्ता मुद्रास्फीति हालांकि अगस्त में मामूली रूप से घटकर 8.3 फीसदी रह गई, जो जुलाई में 8.5 फीसदी थी, लेकिन यह 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर है.