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चीन के शहरों पर मंडराया ब्यूबानिक प्लेग का खतरा, जानिए क्यों और कैसे फैलता है ये?

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कोरोना वायरस दुनिया पे अपना कहर बरसा ही रहा था कि अब चीन जल्द ही दुनिया के लिए दूसरी मुसीबत खड़ी करने जा रहा है। दरअसल कोरोना के बाद चीन में एक और घातक बीमारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है।

उत्तरी चीन के एक शहर में रविवार को ब्यूबानिक प्लेग का संदिग्ध मामला सामने आया है। इसके बाद अलर्ट जारी किया गया है। चीन के सरकारी पीपुल्स डेली ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, आंतरिक मंगोलियाई स्वायत्त क्षेत्र, बयन्नुर ने प्लेग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए तीसरे स्तर की चेतावनी जारी की।

ब्यूबानिक प्लेग का संदिध मामला बयन्नुर के एक अस्पताल में शनिवार (4 जुलाई) को सामने आया। स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकार ने घोषणा की है कि चेतावनी वर्ष 2020 के अंत तक लागू रहेगी। स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकार ने कहा, ‘इस समय इस शहर में मानव प्लेग महामारी फैलने का खतरा है।

बता दें इससे पहले सरकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने एक जुलाई को कहा था कि पश्चिम मंगोलिया के खोड प्रांत में ब्यूबानिक प्लेग के दो संदिग्ध मामले सामने आए थे। उनकी प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हो चुकी है। 27 व 17 वर्षीय भाइयों का उनके प्रांत के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

क्या है ब्यूबानिक प्लेग?

यह प्लेग बहुत कम होता है। लेकिन इसमें गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। यह प्लेग चूहों के जरिए भी फैलता है। इस प्लेग का संक्रमण दूसरे जानवरों या इनसानों में भी हो सकता है। ये एक जूनोटिक बीमारी है इसका मतलब यह हुआ कि यह जानवरों से इंसानों में फैल सकती है। प्लेग से मरे हुए किसी जानवर के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ से भी यह प्लेग फैल सकता है। WHO के मुताबिक, अगर इस बीमारी का इलाज ना किया जाए तो 24 घंटों के भीतर इससे किसी व्यस्क की मौत हो सकती है।

ब्यूबानिक प्लेग के लक्षण

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ब्यूबोनिक प्लेग के लक्षणों में अचानक बुखार आना, ठंड लगना, सिर और शरीर में दर्द और कमजोरी, उल्टी और मतली जैसे लक्षण शामिल हैं। इस प्लेग में इंसान के शरीर में सूजन तक आ जाती है और इंसान बहुत कमज़ोर हो जाता है।

19वीं सदी में ब्यूबानिक प्लेग ने अकेले भारत में ली थी 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान
ब्यूबानिक प्लेग ने एक बार नहीं बल्कि तीन बार दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को अपना शिकार बनाया। इसका तीसरा हमला चीन और भारत पर था। 19वीं सदी के आखिर में इसने अकेले भारत में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी।

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– 1860 में ये महामारी शुरू हुई। इसने सबसे पहले चीन के अंदरूनी इलाकों में हमला बोला और फिर हांगकांग में दाखिल हुआ।

– उस दौर में इस महामारी को मॉडर्न प्लेग का नाम दिया गया। ये चीन के सिल्क रूट के रास्ते दुनिया के बाकी हिस्सों में फैली थी।

– इन्फेक्टेड चूहे ये बीमारी लेकर शिप तक पहुंचे और जहां-जहां भी शिप गए और डॉक्स पर रुके, ये बीमारी भी वहां चली गई। चीन से ही ये बीमारी भारत में फैली। भारत में इसकी शुरुआत 1889 में हुई। इस ने चीन से ज्यादा कहर भारत में मचाया था।

– इसने चीन और भारत में मिलाकर सवा करोड़ से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। यूके की डिफेंस इवेल्युएशन एंड रिसर्च एजेंसी की रिपोर्ट मानें तो अकेले भारत में ही करीब 1 करोड़ मौतें हुईं थी।

– वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, प्लेग के वायरस 1959 तक एक्टिव रहे। हालांकि, इसके चलते होने वाली मौत के आंकड़े आखिरी के साल में गिरकर साल में प्रति वर्ष 200 पहुंचे गए थे।

– ये पोर्ट सिटी हांगकांग के जरिए ब्रिटिश भारत में दाखिल हुआ था। इसका असर सबसे ज्यादा मुंबई, पुणे, कोलकाता और कराची जैसी पोर्ट सिटीज में ही दिखा था। यहां कई समुदाय तो पूरी तरह खत्म हो गए।

अब बस देखना होगा कि क्या चीन इस प्लेग को अपने तक सिमित रख के इससे छुटकारा पा पाती है या दुनिया के सामने एक और मुसीबत खड़ी कर देगी?

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