टेस्ला के शेयरधारकों ने दिया एलन मस्क को इतिहास का सबसे बड़ा वेतन पैकेज

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क को अब इतिहास का सबसे बड़ा वेतन पैकेज मिलने का रास्ता साफ हो गया है। कंपनी के शेयरधारकों ने एक रिकॉर्ड तोड़ पे पैकेज को मंज़ूरी दे दी है, जिससे अगर टेस्ला अपने बड़े लक्ष्यों को हासिल कर लेती है, तो मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर (1 लाख करोड़ डॉलर संपत्ति वाले व्यक्ति) बन सकते हैं।
अमेरिकी चैनल सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला की वार्षिक शेयरधारक बैठक में करीब 75 प्रतिशत निवेशकों ने मस्क के नए वेतन प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। जैसे ही नतीजे घोषित हुए, वहां मौजूद लोगों ने तालियों और नारों से अपनी खुशी ज़ाहिर की। एलन मस्क ने निवेशकों और बोर्ड का शुक्रिया अदा करते हुए कहा,“मैं इसका बेहद आभारी हूं।”
दुनिया के ज़्यादातर सीईओ जहां तय वेतन लेते हैं, वहीं एलन मस्क को कोई सैलरी नहीं मिलती। उनकी कमाई पूरी तरह टेस्ला के शेयरों की कीमत पर निर्भर है। नए प्लान के तहत, मस्क को आने वाले 10 सालों में 423.7 मिलियन टेस्ला शेयर मिल सकते हैं। अगर कंपनी का बाज़ार मूल्य 8.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, तो इन शेयरों की कुल कीमत करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 83 लाख करोड़ रुपये) हो जाएगी।
इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए टेस्ला के शेयरों को मौजूदा स्तर से लगभग 466 प्रतिशत तक बढ़ना होगा — यानी टेस्ला को एनवीडिया जैसी कंपनियों से भी ज़्यादा मूल्यवान बनना होगा, जिसकी वर्तमान वैल्यू करीब 5 ट्रिलियन डॉलर है। अगर एलन मस्क इस पैकेज की 12 परफॉर्मेंस शर्तें पूरी कर लेते हैं, तो उनकी औसतन कमाई 275 मिलियन डॉलर प्रति दिन तक पहुंच सकती है। यह कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा पे पैकेज होगा।
टेस्ला बोर्ड ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर यह प्रस्ताव खारिज हुआ, तो मस्क कंपनी की लीडरशिप से पीछे हट सकते हैं। बोर्ड ने कहा था कि यह पैकेज मस्क को कंपनी के साथ लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए ज़रूरी है। हालांकि मस्क को मिला यह बड़ा भरोसा कंपनी की मौजूदा मुश्किलों को खत्म नहीं करता। 2025 में टेस्ला की बिक्री और मुनाफा दोनों घटे हैं, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग कम हुई है और अमेरिकी सरकार की टैक्स छूट में भी कमी आई है।
इसके बावजूद, शेयरधारकों का मानना है कि मस्क की मौजूदगी ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है। उनका दांव साफ है —
“मस्क को नेतृत्व में रखो, और उम्मीद करो कि टेस्ला एक बार फिर असंभव को संभव कर दिखाए।”




