प्रधानमंत्री मोदी ने असम आंदोलन के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को स्वाहिद दिवस के अवसर पर असम आंदोलन में शहीद हुए सभी लोगों को नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आज हम उन वीरों के साहस और बलिदान को याद करते हैं, जिन्होंने असम आंदोलन में भाग लिया। पीएम मोदी ने कहा कि यह आंदोलन भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और सरकार असम की संस्कृति को मजबूत करने और राज्य के विकास के सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री ने संदेश में कहा कि असम आंदोलन का उद्देश्य राज्य की पहचान, संस्कृति और हितों की रक्षा करना था। उन्होंने दोहराया कि असम आंदोलन में शामिल लोगों के सपनों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है।
Today, on Swahid Diwas, we recall the valour of all those who were a part of the Assam Movement. The Movement will always have a prime place in our history. We reiterate our commitment to fulfilling the dreams of those who participated in the Assam Movement, notably the…
— Narendra Modi (@narendramodi) December 10, 2025
सोनोवाल ने शहीदों को किया याद
स्वाहिद दिवस पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस आंदोलन को एक “भव्य संघर्ष” बताया, जिसका लक्ष्य असम की भाषा, संस्कृति और जनसांख्यिकी की रक्षा करना था। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने असमी समाज को एकजुट होकर राष्ट्रीय हित में सोचने की प्रेरणा दी।
सोनोवाल ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान 860 असमी लोगों ने प्राणों की आहुति दी, जबकि कई अन्य लोगों को उत्पीड़न और गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा और यह हर असमी को समाज और देश के हित में योगदान देने की प्रेरणा देता रहेगा।
The historic Assam Movement was a monumental struggle to protect the language, culture, identity, and existence of Assam. It was a movement that inspired the greater Assamese society to unite strongly in the national interest. The spirit of that movement lives on in the hearts of… pic.twitter.com/q5ns9yACjd
— Sarbananda Sonowal (@sarbanandsonwal) December 10, 2025
स्वाहिद दिवस का इतिहास
स्वाहिद दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। यह उस संघर्ष की याद में मनाया जाता है जो 1979 में असम स्टूडेंट्स यूनियन और ऑल असम गण संघर्ष परिषद द्वारा शुरू किया गया था। आंदोलन का उद्देश्य बांग्लादेश से आए घुसपैठियों के खिलाफ आवाज उठाना था।
यह आंदोलन 1985 में तब खत्म हुआ जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ऐतिहासिक असम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में अवैध प्रवासियों की पहचान करने, और असम की सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विरासत को सुरक्षित रखने का वादा किया गया।
यह दिन असम के शहीदों के साहस, एकता और बलिदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।





