भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों में नया मोड़, जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से की मुलाकात

भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहा है. भारी शुल्क के कारण रुका हुआ व्यापार अब नई गति पकड़ता दिख रहा है. सोमवार की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया. इस बातचीत के उपरांत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया. यह घोषणा होते ही दोनों राष्ट्रों के मध्य नए अवसरों की संभावनाएं उभरने लगी हैं.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत इस निर्णय पर पूरा ध्यान केंद्रित किए हुए है. विश्लेषकों का अनुमान है कि यह कदम सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और खनिज क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण समझौतों का मार्ग प्रशस्त करेगा. टैरिफ में कमी के बाद भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर भी व्यापक सहयोग का स्वरूप उभर रहा है. अगर क्रिटिकल मिनरल्स पर कुछ होता है तो लंबे समय से इस क्षेत्र में चली आ रही चीन की मोनोपॉली भी खत्म हो जाएगी.
वॉशिंगटन डीसी में आयोजित होने वाली पहली ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ बैठक को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे प्रारंभ होने वाली इस बैठक में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भागीदारी कर रहे हैं. बैठक का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ बनाना और चीन पर निर्भरता को घटाना है. विशेषज्ञों का मत है कि यह पहल वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है.
जयशंकर की अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के पश्चात कहा कि उनसे मिलकर प्रसन्नता हुई. उन्होंने बताया कि वार्ता अत्यंत व्यापक रही. इसमें द्विपक्षीय सहयोग के एजेंडे के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ. जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, अहम खनिज और तकनीक जैसे क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई. दोनों देशों ने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न सहयोग तंत्रों की शीघ्र बैठकें आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की.
Delighted to meet US @SecRubio this afternoon.
A wide ranging conversation that covered our bilateral cooperation agenda, regional and global issues.
Facets of India – US Strategic Partnership discussed included trade, energy, nuclear, defence, critical minerals and… pic.twitter.com/1rbXJHgEQY
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 3, 2026
व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक गतिविधियों में तेजी आई है. वॉशिंगटन में संपन्न बैठकों में ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी नवाचार को लेकर साझा रणनीति पर बल दिया गया. विश्लेषकों का मानना है कि यह सहयोग वैश्विक बाजार में नए आर्थिक अवसर उत्पन्न कर सकता है. इससे भारत को निवेश, प्रौद्योगिकी और रोजगार के क्षेत्र में लाभ मिलने की आशा है.
अमेरिका भी इस साझेदारी को इंडो-पैसिफिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है. दोनों देशों के नेताओं का विश्वास है कि लोकतांत्रिक राष्ट्रों के बीच सहयोग से वैश्विक आर्थिक स्थिरता मजबूत होगी. इस पहल से आपूर्ति श्रृंखला विविध होगी और नवीन प्रौद्योगिकियों के विकास को भी गति प्राप्त होगी.





