ईरान-इस्राइल संघर्ष छठे दिन भी जारी, अब तक 600 से अधिक मौतें, ट्रंप ने दी चेतावनी

पश्चिम एशिया में ईरान और इस्राइल के बीच छठे दिन भी तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। बुधवार सुबह कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने इस्राइल पर दो मिसाइल हमले किए। वहीं, इस्राइली जवाबी कार्रवाई में ईरान में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 1300 से अधिक लोग घायल हैं। मृतकों में 239 आम नागरिक और 126 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
इस युद्ध में पहली बार ईरान ने इस्राइल के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइल फतह-1 का इस्तेमाल किया है। इसके जवाब में इस्राइल ने तेहरान और करज के पास बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिससे इन इलाकों में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इस्राइली रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने दावा किया कि तेहरान में सत्ता के प्रतीकों पर हमले हो रहे हैं और शासन का ढांचा चरमरा रहा है।
फतह-1 ईरान की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल है, जिसे अपनी बेहद तेज रफ्तार, उच्च सटीकता और उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इस मिसाइल को खासतौर पर इजरायल की आयरन डोम और ऐरो जैसी एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने के मकसद से तैयार किया गया है। ‘हाइपरसोनिक’ शब्द आमतौर पर उन हथियारों के लिए इस्तेमाल होता है जो पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से चलते हैं। अपनी रफ्तार और दिशा बदलने की कुशलता के कारण इन्हें ट्रैक करना और रोकना बेहद मुश्किल होता है।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिका का धैर्य अब खत्म हो रहा है और ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिका ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई को मारने की योजना नहीं बना रहा, लेकिन यह स्पष्ट किया कि अमेरिका को पता है वह कहां छिपे हैं।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। उत्तर-पूर्वी सीरिया में दो ठिकानों से सेना की वापसी के साथ ही, अब अधिक संख्या में लड़ाकू विमानों और सैनिकों की तैनाती की जा रही है। अमेरिका समर्थित कुर्द बलों ने चिंता जताई है कि इससे इस्लामिक स्टेट के दोबारा उभरने की आशंका बढ़ सकती है।
इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने सोशल मीडिया पर लिखा कि तेहरान में ‘बवंडर’ आया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि प्रसारण प्राधिकरण और अन्य सरकारी इमारतों पर हमले किए जा रहे हैं और शासन के प्रतीक चिन्ह ढह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नागरिक राजधानी छोड़कर भाग रहे हैं और यह किसी भी तानाशाही के पतन की शुरुआत है। ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ता यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है। इससे वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है, खासकर जब दोनों देशों के समर्थक और विरोधी गुट सक्रिय होते जा रहे हैं। अमेरिका की बढ़ती सैन्य सक्रियता से यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि कहीं यह विवाद एक बड़े युद्ध में न बदल जाए।




