गांधी जयंती पर डबलिन में भारतीय समुदाय एकजुट, विविधता में एकता का दिया संदेश

आयरलैंड की राजधानी डबलिन में स्थित भारतीय दूतावास ने महात्मा गांधी की 156वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर भारत के राजदूत श्री अखिलेश मिश्र ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों की आज के समय में प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राजदूत मिश्र ने कहा कि आज जब भारतीय समाज में असहिष्णुता के अनेक रूप उभर रहे हैं और राजनीतिक ध्रुवीकरण लगातार बढ़ रहा है, ऐसे समय में गांधीजी के तीन अराजनीतिक लेकिन गहरे सामाजिक विचारों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।
उन्होंने गांधीजी के तीन महत्वपूर्ण विचारों को रेखांकित किया:
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विरोधियों और आलोचकों के साथ सम्मानजनक संवाद –
महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में अनेक कट्टर आलोचकों और वैचारिक विरोधियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी भी अपमानजनक भाषा या असम्मानजनक व्यवहार नहीं किया। वे सदैव संवाद और बहस के माध्यम से समाधान की ओर बढ़ते थे। यह सिद्धांत आज के समय में, जब विचारों के मतभेद अक्सर विद्वेष का रूप ले लेते हैं, बेहद प्रेरणादायक है। -
नारी सम्मान और महिला सशक्तिकरण का समन्वित प्रयास –
गांधीजी के विचारों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं को सक्रिय रूप से जोड़ा और उनके सम्मान और आत्मनिर्भरता पर हमेशा बल दिया। आज के सामाजिक परिदृश्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में उनका दृष्टिकोण और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। -
आत्म-विश्वास, आत्म-गौरव और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व –
गांधीजी हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि प्रत्येक भारतीय को अपनी संस्कृति, सभ्यता और पहचान पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भरता और आत्मगौरव को स्वतंत्रता की नींव माना। आज की पीढ़ी के लिए यह विचार आत्म-सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणास्रोत है।
राजदूत मिश्र ने कहा कि गांधीजी की शिक्षाएं केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके समय में थीं। विशेष रूप से जब समाज में वैचारिक विभाजन, असहिष्णुता और सामाजिक तनाव की प्रवृत्ति बढ़ रही हो, तो गांधीजी की शांति, सहिष्णुता और संवाद की नीति मार्गदर्शक बन सकती है।
कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के सदस्य, स्थानीय नागरिक और अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। सभी ने महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही, गांधीजी के विचारों पर आधारित भाषण, भजन और संवाद सत्र भी आयोजित किए गए।




