समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर भारत का जोर, एस. जयशंकर का बड़ा बयान

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत समुद्री रास्तों को सुरक्षित और बिना रुकावट बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी प्लस बैठक में उन्होंने मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत समान सोच वाले देशों के साथ मिलकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है।
क्षेत्रीय सहयोग पर जोर
इसी मुद्दे पर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी क्षेत्रीय सहयोग की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की स्थिर और पर्याप्त आपूर्ति के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने इस अहम बैठक के आयोजन के लिए जापान की प्रधानमंत्री सानेए ताकाइची की सराहना की और कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति ने दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
Participated in the ‘AZEC Plus’ meeting convened by Japan to discuss supply chain disruptions in the energy markets.
Underlined India’s strong commitment to safe and unimpeded transit passage of maritime shipping. Attacks on merchant shipping are completely unacceptable. Global… pic.twitter.com/wsiQokYU5e
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 15, 2026
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव
दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूटने के बाद कई अहम समुद्री रास्तों पर पाबंदियां लगा दी गई हैं, जिससे ईरान के बंदरगाह और आसपास के इलाकों पर असर पड़ा है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी। यह रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से के कच्चे तेल की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इन हालात के बीच दुनिया के नेताओं ने माना कि सुरक्षित समुद्री रास्ते और स्थिर ऊर्जा बाजार वैश्विक आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। अगर सप्लाई में रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत समेत कई देश ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए हैं और मिलकर समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।





