
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषा विवाद पर एक बड़ा और संतुलित बयान दिया है। महाराष्ट्र दिवस (1 मई, 2026) के अवसर पर हुतात्मा चौक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में रहने वाले सभी लोगों को मराठी भाषा सीखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा या विवाद पूरी तरह से “अस्वीकार्य” है।
भाषा का सम्मान और गौरव
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि अपनी मातृभाषा पर गर्व होना स्वाभाविक और आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जो लोग महाराष्ट्र में निवास करते हैं, उन्हें मराठी भाषा सीखने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि यदि किसी ने अभी तक भाषा नहीं सीखी है, तो सरकार उन्हें सिखाने में मदद करेगी।
समावेशी महाराष्ट्र की विचारधारा
फडणवीस ने उन संकीर्ण विचारधाराओं को खारिज किया जो कहती हैं कि बाहरी लोग राज्य में नहीं रह सकते। उन्होंने कहा:
“महाराष्ट्र कभी भी इतना संकीर्ण नहीं रहा है कि वह यह कहे कि राज्य के बाहर के लोग यहाँ नहीं रह सकते।”
यह बयान राज्य सरकार द्वारा ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी अनिवार्य करने के निर्देश के बीच आया है।
विकास का पावरहाउस
मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र को देश का “पावरहाउस” और “ग्रोथ इंजन” बताया। उन्होंने याद दिलाया कि महाराष्ट्र एक सुधारवादी राज्य रहा है जिसने ‘भक्ति आंदोलन’ देखा है और यह दुनिया की 30वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर उन्होंने श्रमिकों को भी शुभकामनाएं दीं।





