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Janmashtami 2021: कृष्ण जन्माष्टमी पर आज इस शुभ मुहूर्त में होगी पूजा, जानें, नियम, पूजन मंत्र और पूजा की सर्वोतम विधि

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आज पूरे देश में बहुत धूमधाम से कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। अगर सबसे पहले बात करे कि जन्माष्टमी कब मनाई जाती है तो बता दे कि हर साल भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है । दरअसल भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी के निर्धारण में अष्टमी तिथि का बहुत ज्यादा ध्यान रखते है।

जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त।

आज कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 59 मिनट से देर रात 12 बजकर 44 मिनट तक है। कुल अवधि 45 मिनट की है। शुभ मुहूर्त में पूजन से कान्हा की विशेष कृपा मिलती है। वहीं व्रत पारण का समय 31 अगस्त को सुबह 5 बजकर 57 मिनट के बाद का है।

अब जानें पूजा विधि।

जन्माष्टमी के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ कपड़े पहनकर व्रत और पूजा करने का संकल्प लेते हैं। इस पूरे दिन कृष्ण भक्त व्रत रखते हैं और रात के 12 बजे में कृष्ण जन्मोत्सव मनाते हैं। जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण की बाल स्वरूप में पूजा होती है। रात्रि में पंचामृत से अभिषेक करें और फिर भगवान कृष्ण को नए वस्त्र, मोर मुकुट, बांसुरी, चंदन, वैजयंती माला, तुलसी, फल, फूल, मेवे, धूप, दीप, गंध आदि अर्पित करें। फिर लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं। इसके बाद माखन मिश्री या धनिया की पंजीरी का भोग लगाएं और बाद में आरती करके प्रसाद को वितरित करें।

व्रत में इन नियमों का रखे ध्यान।

इतना ही नहीं, इस पावन दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा के साथ ही गाय की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा स्थल पर भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के साथ गाय की मूर्ति भी रखें। पूजा स्थल साफ़ सुथरा और शांत होना चाहिए। पूजा में केवल गाय के दूध, दही, मक्खन और घी का ही इस्तेमाल करें। वही भगवान श्री कृष्ण का गंगा जल से अभिषेक जरूर करवाए।

ऐसे करें नंदलाला का श्रृंगार।

एक चौकी पर भगवान् कृष्ण को स्थापित करें। भगवान के सामने दीपक धूपबत्ती जलाएं। श्री कृष्ण को पंचामृत और फिर गंगाजल से स्नान कराएं। श्री कृष्ण के श्रृंगार में फूलों का खूब प्रयोग करें। पीले रंग के वस्त्र, गोपी चन्दन और चन्दन की सुगंध से इनका श्रृंगार करें।

विष्णु के 8वें अवतार थे श्री कृष्ण।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रात में 12 बजे रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में हुआ था। जन्म के समय जयंती योग बना हुआ था। कहा जाता है कि ये भगवान विष्णु के 8वें अवतार हैं। हर साल भगवान श्री कृष्ण की जन्म तिथि को जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं।

और कान्हा को यह चढ़ाये प्रसाद में।

जन्माष्टमी के प्रसाद में पंचामृत जरूर अर्पित करें। उसमे तुलसी दल भी जरूर डालें. मेवा, माखन और मिसरी का भोग भी लगाएं। कहीं-कहीं, धनिये की पंजीरी भी अर्पित की जाती है।

संतान प्राप्ति के लिए करे यह जाप।

ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।

नोट- यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.

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