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अयोध्या भूमि विवाद मामले में पक्षकार ने जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की अपील की गई, जिसके बाद यह मामला जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में फिर से उठ सकता है.

इस मामले के पक्षकारों में से एक, गोपाल सिंह विशारद ने मंगलवार को मामले की जल्द सुनवाई की अपील की. उन्होंने कहा कि इस साल की शुरुआत में शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त मध्यस्थ इस मुद्दे के समाधान में ज्यादा प्रगति नहीं कर पाई है.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जो न्यायाधीशों की एक बेंच की अध्यक्षता कर रहे थे, गोपाल सिंह विशारद के अनुरोध पर गौर करने के लिए तैयार हो गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने कहा कि हम अयोध्या जमीन विवाद और इसके प्रभाव को गंभीरता से समझते हैं और जल्दी फैसला सुनाना चाहते हैं.

मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए मार्च 2019 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की स्थापना की गई थी. तीनों की समिति सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफएम खलीफुल्लाह की अध्यक्षता में है और इसमें आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक, श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रसिद्ध मध्यस्थ श्रीराम पांचू शामिल हैं.

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बता दें कि मध्यस्ता को लेकर भी दोनों तरफ के पक्षकारों के बीच असहमति रही है. हालांकि हिंदू महासभा मध्यस्थता के खिलाफ है. जबकि निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए राजी है.

शीर्ष अदालत ने दोनों ही पक्षों से कहा था कि जहां तक संभव हो, मामले को मध्यस्ता से ही सुलझाया जाना चाहिए. इसके लिए अदालत ने पार्टियों को मध्यस्ता के लिए नामों का सुझाव रखने का भी प्रस्ताव रखा था.

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