मानसून के बाद भी क्यों नहीं मिल रही गर्मी से राहत? जानिए भारत के शहरों में बढ़ती उमस और हीट का कारण

देश के कई हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को उमस और तेज गर्मी से राहत नहीं मिल रही है। दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है, जिससे लोगों को लगातार गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल तापमान ही नहीं, बल्कि बढ़ती नमी (Humidity) और गर्म रातें भी बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और Council on Energy, Environment and Water (CEEW) समेत कई संस्थानों के अध्ययन बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से हो रहा शहरीकरण और बढ़ती आर्द्रता भारतीय शहरों में हीट स्ट्रेस (Heat Stress) को पहले से ज्यादा गंभीर बना रहे हैं।
मानसून के बाद भी क्यों महसूस हो रही है ज्यादा गर्मी?
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश होने के बाद वातावरण में नमी काफी बढ़ जाती है। अधिक नमी के कारण शरीर से निकलने वाला पसीना आसानी से नहीं सूखता, जिससे शरीर प्राकृतिक रूप से ठंडा नहीं हो पाता। यही वजह है कि वास्तविक तापमान कम होने के बावजूद लोगों को गर्मी ज्यादा महसूस होती है।
दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई शहरों में हाल के वर्षों में हीट इंडेक्स (Heat Index) कई बार 50 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। हीट इंडेक्स वह पैमाना है जो तापमान और नमी दोनों को मिलाकर बताता है कि मौसम वास्तव में कितना गर्म महसूस हो रहा है।
CEEW रिपोर्ट में क्या सामने आया?
CEEW की रिपोर्ट के अनुसार भारत के कई बड़े शहरों में गर्म रातों (Warm Nights) की संख्या लगातार बढ़ रही है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद, भोपाल और भुवनेश्वर जैसे शहरों में दिन और रात दोनों समय हीट स्ट्रेस बढ़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक कई घनी आबादी वाले शहरों में शहरीकरण और कंक्रीट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण रात के समय भी तापमान तेजी से नीचे नहीं आ पाता। इससे लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिलती।
बढ़ती नमी बनी नई चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी अब देश के अंदरूनी हिस्सों तक अधिक पहुंच रही है। इससे विशेष रूप से इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों में उमस बढ़ रही है।
अधिक नमी के कारण एयर कंडीशनर और कूलर की मांग भी बढ़ जाती है, जिससे बिजली की खपत पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
शहरों में क्यों बढ़ रहा है हीट स्ट्रेस?
विशेषज्ञ इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताते हैं—
- तेजी से बढ़ता शहरीकरण
- कंक्रीट और डामर की अधिक सतह
- हरित क्षेत्रों में कमी
- Urban Heat Island प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और नमी
इन कारणों से शहर दिन में अधिक गर्म होते हैं और रात में भी तेजी से ठंडे नहीं हो पाते।
क्या हैं समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्थायी राहत पर्याप्त नहीं होगी। शहरों में दीर्घकालिक उपाय अपनाने की आवश्यकता है, जिनमें शामिल हैं—
- अधिक हरित क्षेत्र विकसित करना
- कूल रूफ (Cool Roof) तकनीक का उपयोग
- बेहतर वेंटिलेशन वाले भवन
- गर्मी के अनुकूल शहरी योजना
- हीट एक्शन प्लान को पूरे वर्ष प्रभावी बनाना
IMD और विशेषज्ञों की सलाह
IMD लोगों को गर्म और उमस भरे मौसम के दौरान पर्याप्त पानी पीने, धूप में लंबे समय तक रहने से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने की सलाह देता है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में केवल अधिक तापमान ही नहीं, बल्कि बढ़ती नमी और गर्म रातों से निपटने के लिए भी शहरों को तैयार करना होगा।
बदल रहा है भारत का मौसम पैटर्न
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। मानसून आने के बाद भी गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हो रही है। ऐसे में भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर शहरी विकास, हरित बुनियादी ढांचे और प्रभावी हीट प्रबंधन योजनाओं पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है।





