विदेश

भारत-यूके व्यापार समझौता आज से लागू, किसानों से लेकर आईटी सेक्टर तक को होगा फायदा

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) आज से लागू हो गया है। इसे हाल के वर्षों में भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस समझौते से किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान लागू होने वाला छठा मुक्त व्यापार समझौता है।

यह समझौता सिर्फ आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसर भी खोलेगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, इससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप और युवा पेशेवरों को नए मौके मिलेंगे।

भारत को क्या होगा फायदा?

इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा। वहीं ब्रिटेन से आने वाले कई सामानों पर भी आयात शुल्क कम होगा, जिससे उनकी कीमतें घट सकती हैं। इसके अलावा ब्रिटेन की कंपनियां पहली बार भारत सरकार की करीब 40 हजार बड़ी सरकारी निविदाओं में हिस्सा ले सकेंगी।

सीईटीए क्या है?

सीईटीए एक व्यापक व्यापार समझौता है, जिसके तहत दोनों देश कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म करेंगे। साथ ही डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, निवेश, बौद्धिक संपदा, एमएसएमई, श्रम, पर्यावरण और सेवा क्षेत्र से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया गया है। इस समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं।

स्कॉच व्हिस्की होगी सस्ती

समझौते के बाद स्कॉच व्हिस्की समेत कई प्रीमियम विदेशी शराबों पर आयात शुल्क कम होगा। स्कॉच व्हिस्की पर अभी 150 प्रतिशत शुल्क लगता है, जिसे पहले चरण में 75 प्रतिशत और अगले 10 वर्षों में घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा।

कुछ उत्पाद समझौते से बाहर

भारत ने सेब, अखरोट, कुछ बीज, व्हे, सोने की ईंटों और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वहीं ब्रिटेन ने चावल, चीनी और कुछ मांस उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है।

आईटी कर्मचारियों को राहत

डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन लागू होने से भारत से ब्रिटेन काम करने जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच साल तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी का योगदान नहीं देना होगा। इससे आईटी और सेवा क्षेत्र को राहत मिलेगी।

ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव

इस समझौते के तहत पहली बार ब्रिटेन में बनी कारों और ट्रकों पर भारत ने बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह तैयार कारों पर आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही राहत मिलेगी, जबकि इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे साल से रियायत मिलेगी ताकि शुरुआती वर्षों में भारतीय ईवी उद्योग को सुरक्षा मिल सके।

किन उद्योगों को होगा फायदा?

रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल-सब्जियां, मसाले, मछली और समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट और स्टोन उद्योगों को इस समझौते का लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या हो सकता है सस्ता?

इस समझौते के बाद सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम और नेल पॉलिश जैसी कई ब्रिटिश वस्तुएं पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं।

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