
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक मां ने अपनी ही नवजात बेटी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। ठाणे की एक अदालत ने इस जघन्य अपराध के लिए दोषी महिला नूरानी (खातून) जाहिद शेख (28) को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
घटना का विवरण
यह घटना 18 से 19 मार्च, 2024 के बीच हुई थी। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला ने घर में ही अपनी नवजात बेटी पर धारदार किचन चाकू से हमला किया। घटना का खुलासा तब हुआ जब एक अज्ञात व्यक्ति ने पुलिस को तस्वीरें भेजीं, जिसके बाद पुलिस ने गहन फोरेंसिक जांच की और स्थानीय कब्रिस्तान से बच्ची के शव को बाहर निकाला (exhummation)।
बड़ी बेटियों की गवाही बनी निर्णायक
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने 16 गवाहों से पूछताछ की। सबसे अहम सबूत दंपति की दो बड़ी बेटियाँ थीं, जिन्होंने अपनी मां को बच्ची पर चाकू से हमला करते देखा था। अदालत ने इन नाबालिगों की गवाही पर भरोसा जताया और स्पष्ट किया कि एक सक्षम और विश्वसनीय बाल गवाह दोषसिद्धि का आधार बन सकता है।
बचाव पक्ष का तर्क और कोर्ट की टिप्पणी
बचाव पक्ष ने दावा किया था कि बच्ची की मौत ‘एपिडर्मोलिसिस बुलोसा’ (Epidermolysis Bullosa) नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक त्वचा रोग से हुई थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खोपड़ी और गर्दन के क्षेत्र में 14 अलग-अलग गहरे घाव पाए गए, जो किसी भी त्वचा रोग से मेल नहीं खाते थे। कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्क को खारिज कर दिया।
पिता को भी मिली सजा
बच्ची के पिता, जाहिद सलामत शेख (38), को सबूत मिटाने और अपराधी को बचाने के लिए आईपीसी की धारा 201 के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने पाया कि उसने गलत जानकारी देकर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और मामले को दबाने के लिए बच्ची को जल्दबाजी में दफनाया।





