Iran US talks: पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, तेहरान का साफ संदेश

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के बीच ईरान ने बड़ा बयान दिया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा है कि पाकिस्तान इन वार्ताओं के लिए “उपयुक्त मध्यस्थ” नहीं है।
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रवक्ता Ebrahim Rezaei ने कहा कि पाकिस्तान बातचीत के दौरान अक्सर अमेरिका के हितों को प्राथमिकता देता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि एक मध्यस्थ का निष्पक्ष होना जरूरी है, लेकिन पाकिस्तान इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
“पाकिस्तान अच्छा पड़ोसी, लेकिन भरोसे की कमी”
ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक “अच्छा दोस्त और पड़ोसी” है, लेकिन बड़े और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों में मध्यस्थ बनने के लिए आवश्यक भरोसा नहीं रखता। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अक्सर अमेरिका के रुख के खिलाफ बोलने से बचता है।
پاکستان دوست و همسایه خوب ماست اما واسطه مناسبی جهت مذاکرات نیست و اعتبار لازم را برای واسطهگری ندارد. آنها همیشه مصلحت ترامپ را در نظر میگیرند و برخلاف میل آمریکاییها حرفی نمیزنند بطور مثال حاضر نیستند به دنیا بگویند که آمریکا ابتدا پیشنهاد پاکستان را پذیرفت اما بعد زیر حرفش…
— ابراهیم رضایی (@EbrahimRezaei14) April 26, 2026
बातचीत में क्यों आई रुकावट?
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। दोनों देशों के बीच 21 घंटे तक चर्चा चली, लेकिन किसी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी।
ईरान का कहना है कि बातचीत में अमेरिका की “अत्यधिक मांगें” और आपसी अविश्वास बड़ी बाधा बने। वहीं, दोनों पक्षों ने बातचीत के रास्ते खुले रखने पर सहमति जरूर जताई है।
सीजफायर विवाद ने बढ़ाया तनाव
ईरान ने इससे पहले अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था। यह समझौता फरवरी में हुआ था, जिसमें पाकिस्तान की भी भूमिका बताई गई थी। इस मुद्दे के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।





