भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO ने शुक्रवार को गगनयान मिशन के लिए दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर में किया गया।
यह टेस्ट इसलिए बहुत अहम माना जाता है क्योंकि इसका उद्देश्य उस क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग और रिकवरी की जांच करना है, जिसमें भविष्य में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटेंगे। इस टेस्ट में लगभग 5.7 टन वजनी एक सिमुलेटेड क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से करीब 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया। इसके बाद इसे समुद्र के पास निर्धारित ड्रॉप ज़ोन में छोड़ा गया।
पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण
इस दौरान कुल 10 पैराशूटों को अलग-अलग चरणों में खोला गया, जिससे मॉड्यूल की रफ्तार कम होती गई और सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकी। यह पूरा सिस्टम इस बात की जांच के लिए था कि किसी आपात स्थिति या मिशन फेल होने पर भी क्रू मॉड्यूल सुरक्षित रह सके।
समुद्र में सफल रिकवरी
पैराशूट से सुरक्षित लैंडिंग के बाद मॉड्यूल को भारतीय नौसेना की मदद से सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया गया। यह टेस्ट गगनयान मिशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। इससे पहले ऐसा ही पहला परीक्षण 24 अगस्त 2025 को किया गया था।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस सफलता पर ISRO को बधाई दी और इसे भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए एक बड़ा कदम बताया।
आगे की तैयारी
ISRO का यह लगातार सफल परीक्षण दिखाता है कि भारत का मानव अंतरिक्ष मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में गगनयान के लॉन्च की तैयारी मजबूत हो रही है।