टाइटल विवाद खत्म, नीरज पांडे ने वापस लिया ‘घूसखोर पंडित’ नाम

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अभिनेता मनोज बाजपेयी की आने वाली फ़िल्म घूसखोर पंडित के टाइटल से जुड़े मामले का निपटारा कर दिया। यह फैसला तब आया, जब फ़िल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने अदालत में हलफनामा दाख़िल कर साफ़ किया कि फ़िल्म का पुराना नाम और उससे जुड़ा सारा प्रचार सामग्री पूरी तरह वापस ले ली गई है।
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने नीरज पांडे के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अब इस मामले का सभी पहलुओं से अंत हो जाना चाहिए। हलफनामे में नीरज पांडे ने कहा कि फ़िल्म का पहले वाला नाम अब किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में जो भी नया नाम रखा जाएगा, वह पुराने नाम से मिलता-जुलता या उसे याद दिलाने वाला नहीं होगा।
नीरज पांडे ने आगे कहा कि फ़िल्म का नया नाम कहानी की भावना को सही तरीके से दर्शाएगा और उन कारणों से पूरी तरह बचेगा, जिनकी वजह से पहले विवाद खड़ा हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया टाइटल अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन वह समाज की भावनाओं का सम्मान करेगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 12 फरवरी को फ़िल्म के टाइटल को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समुदाय या वर्ग को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री को सही नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा था कि रचनात्मक आज़ादी के साथ सामाजिक ज़िम्मेदारी भी ज़रूरी है।
दरअसल, याचिका में मांग की गई थी कि विवादित टाइटल की वजह से फ़िल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix पर रिलीज़ करने पर रोक लगाई जाए।
फ़िल्म के बारे में
यह फ़िल्म नीरज पांडे के निर्देशन में बनी एक काल्पनिक क्राइम ड्रामा है। कहानी एक ऐसे पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नैतिक रूप से पूरी तरह साफ़ नहीं है और भ्रष्टाचार व साज़िशों के जाल में फंसा हुआ है। इस किरदार को मनोज बाजपेयी निभा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद अब फ़िल्म के नए नाम और आगे की रिलीज़ प्रक्रिया का रास्ता साफ़ हो गया है।





