बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा: चयांसा गांव में जहरीले पानी से मौतें

हरियाणा के चयांसा गांव में पानी की गंभीर प्रदूषण की वजह से कम से कम 12 लोग, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं, पिछले 15 दिनों में अपनी जान गंवा चुके हैं। ये घटनाएं जनवरी के अंत से फरवरी के मध्य तक हुईं और इससे पीने के पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मृतकों में कई लोगों ने बुखार, पेट दर्द, उल्टी और पीलिया जैसी शिकायतें जताई थीं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि कुछ मौतें तीव्र हेपेटाइटिस और लिवर फेल्योर से जुड़ी लगती हैं, हालांकि सटीक कारणों की जांच जारी है।
चयांसा गांव में लगभग 5,700 लोग रहते हैं। यहां 31 जनवरी को पहली बार पीलिया से जुड़ी मौतों की सूचना मिली। इसके अगले दिन एक मेडिकल टीम गांव में भेजी गई। तब से स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर सर्वे किया, मेडिकल कैंप लगाए और संभावित संक्रमणों के लिए निवासियों की जांच की।
पानी की गुणवत्ता जांच में चिंता
107 घरों से लिए गए पानी के नमूनों में से 23 में गुणवत्ता मानक पूरे नहीं हुए। कई नमूनों में बैक्टीरिया और कम क्लोरीन स्तर पाया गया। कुछ पानी की टंकी में कोलिफ़ॉर्म बैक्टीरिया भी मिले। गांव के लोग पाइपलाइन, अंडरग्राउंड स्टोरेज और टैंकर के जरिए पानी का उपयोग करते हैं।
अब तक लगभग 1,500 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें मृतकों के परिवार और संपर्क में रहे लोग शामिल हैं। रक्त परीक्षण में कुछ लोगों में हेपेटाइटिस बी और सी पाए गए, जबकि हेपेटाइटिस ए और ई के परिणाम नेगेटिव आए। अन्य संभावित संक्रमणों की रिपोर्ट का इंतजार है।
इंदौर मामले से तुलना
चयांसा की स्थिति की तुलना हाल ही में इंदौर में हुई पानी की जहरीली घटनाओं से की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दिखाता है कि पानी की नियमित जांच, उचित क्लोरीनेशन और पाइपलाइन का रख-रखाव कितना जरूरी है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी चिंता
दिल्ली के आसपास के कुछ क्षेत्रों में भी असुरक्षित पीने के पानी को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि संक्रमित पानी से हैजा, टाइफायड और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां फैल सकती हैं, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में।
सरकारी कदम
पलवल प्रशासन ने पानी की जांच तेज कर दी है, टैंकर आपूर्ति बढ़ाई है और इमरजेंसी स्वास्थ्य कैंप स्थापित किए हैं। निवासियों को सलाह दी गई है कि पीने का पानी उबालकर ही पिएं। जांच और राहत कार्य जारी हैं।





