यूपी सरकार का बड़ा फैसला: सीमावर्ती जिलों में बिना पैन नहीं होगी संपत्ति रजिस्ट्री

लखनऊ — उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत-नेपाल सीमा से लगे जिलों में संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक अहम फैसला लिया है. स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग ने इन इलाकों में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए अब पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया है. इससे पहले फॉर्म-60 के जरिए भी रजिस्ट्री कराई जा सकती थी, लेकिन अब इस विकल्प को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है.
महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने इस संबंध में सभी निबंधन अधिकारियों, सहायक महानिरीक्षक निबंधन और उप निबंधकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. आदेश के मुताबिक, विभागीय ऑनलाइन लेखपत्र पंजीकरण सॉफ्टवेयर में अब खरीदार और विक्रेता दोनों पक्षों के पैन की अनिवार्य प्रविष्टि और सत्यापन की व्यवस्था लागू हो चुकी है.
यह कदम मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध धन के निवेश और सीमा पार के संदिग्ध लेन-देन को रोकने के लिए उठाया गया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
किन जिलों में लागू हुआ यह नियम?
भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों में अक्सर बेनामी या फर्जी नामों से संपत्ति खरीदने के मामले सामने आते रहे हैं, जिससे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का खतरा बना रहता है. नई व्यवस्था से अब सभी लेन-देन की पूरी जानकारी आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों तक सीधे पहुंचेगी, जिससे निगरानी और जांच में आसानी होगी.
यह नियम विशेष रूप से नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों—गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी आदि में लागू किया गया है. इन क्षेत्रों में अब संपत्ति रजिस्ट्री के दौरान आधार सत्यापन के साथ-साथ पैन की जांच भी अनिवार्य होगी. यदि कोई पक्षकार पैन कार्ड प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो उसकी रजिस्ट्री संभव नहीं होगी.





