वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत ढाल बना सेवा क्षेत्र: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26

दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता और औद्योगिक गतिविधियों की सुस्ती के बीच भारत का सेवा क्षेत्र (Services Sector) देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, सेवा क्षेत्र न सिर्फ देश के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में आधे से अधिक का योगदान दे रहा है, बल्कि यह रोजगार, निर्यात और आर्थिक स्थिरता का भी बड़ा आधार बन चुका है।
सर्वेक्षण में बताया गया है कि डिजिटल, ज्ञान आधारित और अनुभव आधारित सेवाओं में तेज़ी से विस्तार हुआ है, जिससे भारत की आर्थिक रफ्तार बनी हुई है और वैश्विक झटकों से देश को बचाव मिला है।
GDP और GVA में रिकॉर्ड हिस्सेदारी
आर्थिक सर्वे के अनुसार, FY26 की पहली छमाही (H1) में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी GDP में बढ़कर 53.6% हो गई है। वहीं, FY26 के प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) के मुताबिक, GVA में इसकी हिस्सेदारी अब तक के उच्चतम स्तर 56.4% पर पहुंच गई है। यह इस बात का संकेत है कि भारत में आधुनिक, डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार योग्य सेवाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
सेवाओं के निर्यात में भारत की मजबूत स्थिति
भारत आज दुनिया का सातवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक देश बन चुका है। वैश्विक सेवा व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 2005 में 2% थी, जो बढ़कर 2024 में 4.3% हो गई है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
FDI का सबसे बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र को
सर्वेक्षण के अनुसार, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के मामले में भी सेवा क्षेत्र सबसे आगे है। FY23 से FY25 के दौरान कुल FDI का औसतन 80.2% हिस्सा सेवा क्षेत्र को मिला, जो महामारी से पहले की अवधि (FY16-FY20) में 77.7% था।
सेवा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में अवसर
आर्थिक सर्वे में पर्यटन, आईटी और आईटी सक्षम सेवाएं, परिवहन, दूरसंचार, रियल एस्टेट, मीडिया एवं मनोरंजन और अंतरिक्ष सेवाओं जैसे उप-क्षेत्रों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि ये क्षेत्र न सिर्फ विविध हैं, बल्कि इनमें भविष्य की बड़ी संभावनाएं भी मौजूद हैं।
नए क्षेत्रों पर फोकस की जरूरत
सर्वेक्षण ने सुझाव दिया है कि ऑरेंज इकोनॉमी, नए हाइकिंग ट्रेल्स, मरीना विकास, और समुद्री संसाधनों के व्यावसायीकरण जैसे नए क्षेत्रों को विकसित करने से सेवा क्षेत्र लंबे समय तक देश की आर्थिक वृद्धि का मजबूत इंजन बना रह सकता है।
स्थिर और कम जोखिम वाला विकास मॉडल
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे स्थिर और भरोसेमंद हिस्सा बन गया है। जहां कृषि और उद्योग क्षेत्र में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, वहीं सेवा क्षेत्र हर साल औसतन 7–8% की स्थिर वृद्धि दर्ज कर रहा है।
तकनीक से बढ़ी चुनौतियां भी
हालांकि तकनीकी प्रगति ने सेवा क्षेत्र को आगे बढ़ाया है, लेकिन सर्वेक्षण ने चेतावनी दी है कि तकनीक की रफ्तार, कर्मचारियों और कंपनियों की तैयारी से तेज़ हो रही है, जिससे स्किल गैप बढ़ रहा है।
डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता की मांग बढ़ रही है, जबकि कई सामान्य नौकरियों में ऑटोमेशन का खतरा भी बढ़ा है।
वैश्विक नियमों से भी असर
सर्वे में कहा गया है कि विकसित देशों में कड़े इमिग्रेशन नियम, डेटा सुरक्षा और स्थानीयकरण कानून, तथा रेमिटेंस से जुड़े नियम भारत की सेवाओं के वैश्विक विस्तार को प्रभावित कर रहे हैं।
सरकार की नीतियों से मिला समर्थन
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, सरकार की फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और आर्थिक साझेदारियों पर केंद्रित नीति से भारतीय सेवाओं को नए बाज़ार मिले हैं। इसके साथ ही, स्किल डेवलपमेंट, शहरी बुनियादी ढांचे और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
आगे की राह
सर्वेक्षण में कहा गया है कि आने वाले समय में भारत की सेवा अर्थव्यवस्था की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि उत्पादकता कितनी बढ़ती है, नई तकनीकों को कितनी तेजी से अपनाया जाता है, और नियमों को कितना सरल बनाया जाता है।
प्रमुख क्षेत्रों के लिए सुझाव
आईटी और आईटीईएस सेक्टर के लिए समय पर री-स्किलिंग, डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल और स्टार्टअप फ्रेंडली नीतियों की जरूरत बताई गई है।
पर्यटन क्षेत्र में लंबी दूरी के ट्रैकिंग रूट, मरीना नीति, लाइव इवेंट्स की आसान अनुमति और विदेशी कलाकारों को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। अंतरिक्ष और समुद्री सेवाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए तेज़ी से आगे बढ़ सकती हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण ने निष्कर्ष निकाला है कि सही नीतियों, निवेश और कौशल विकास के साथ सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को न केवल मजबूती देगा, बल्कि रोजगार और समावेशी विकास का भी मजबूत आधार बनेगा।





