भारत के 77वें गणतंत्र दिवस से पहले शंघाई में भारतीय संस्कृति का जश्न

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस से पहले चीन के शंघाई में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक विशेष सांस्कृतिक और विरासत कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शंघाई में भारतीय समुदाय की ऐतिहासिक मौजूदगी और भारत-चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे लोगों के आपसी संबंधों को उजागर करना था।
“Indians in Shanghai” नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व शंघाई में भारत के कौंसुल जनरल प्रतीक माथुर ने किया। इसमें भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य, स्थानीय प्रतिनिधि, राजनयिक और BRICS न्यू डेवलपमेंट बैंक के अधिकारी भी शामिल हुए।
Celebrating our great Republic! 🇮🇳☀️#VasudhaivaKutumbakam 🌎🪷
In the lead upto our 77th Republic Day celebrations, CG @PratikMathur1 together with the leading Historical Society of China @HistoricSH curated a “Indians in Shanghai” event for Friends of India from the… pic.twitter.com/xE2SrTTSMq
— India In Shanghai (@IndiaInShanghai) January 25, 2026
कार्यक्रम में इतिहासकार पैट्रिक क्रैनली और टीना कनगरत्नम ने बताया कि शंघाई की प्रसिद्ध जगह ‘द बंड’ शब्द हिंदी से लिया गया है, जो भारत और चीन के बीच सदियों पुराने समुद्री व्यापार संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने समझाया कि कैसे व्यापार और शिपिंग रूट्स ने शंघाई को एक वैश्विक शहर बनाने में अहम भूमिका निभाई।
इस दौरान वर्ष 1908 में बने शंघाई गुरुद्वारे के इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय सिख समुदाय ने इस गुरुद्वारे को आज़ाद हिंद फौज के इस्तेमाल के लिए दिया था। बाद में यह स्थान प्रशिक्षण शिविर बना, जहां 1944 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी पहुंचे थे।

कार्यक्रम में भारतीय सेना के सिख सैनिकों और ग़दर पार्टी के सदस्यों के बलिदान को भी याद किया गया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भारत की आज़ादी का संदेश फैलाया। इसके अलावा, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने कई बार शंघाई की यात्रा की थी। वक्ताओं ने टाटा समूह, शिपिंग कंपनियों और बैंकिंग संस्थानों जैसे एचएसबीसी के जरिए भारत और शंघाई के बीच बने पुराने व्यापारिक संबंधों का भी जिक्र किया।
कार्यक्रम के दौरान लोगों ने आज़ाद हिंद फौज से जुड़े स्थलों के साथ-साथ पारसी, दाऊदी बोहरा और यहूदी समुदायों से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों का दौरा किया, जिनकी जड़ें गुजरात और मुंबई से जुड़ी हैं। इस मौके पर इन समुदायों के इतिहास पर आधारित एक लघु डॉक्यूमेंट्री भी जारी की गई।
कार्यक्रम की सराहना करते हुए कौंसुल जनरल प्रतीक माथुर ने कहा कि विदेशों में भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को सहेजना बेहद जरूरी है। उन्होंने भारत की सॉफ्ट पावर और वैश्विक समाज में उसके योगदान को भी रेखांकित किया।





