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ट्रंप की टैरिफ धमकी से यूरोप-अमेरिका व्यापार समझौते पर ब्रेक

यूरोपीय संघ (EU) ने जुलाई 2025 में घोषित EU–US ट्रेड एग्रीमेंट की मंजूरी (Ratification) को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद लिया गया है, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क और कुछ अन्य यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही थी।

इस फैसले की पुष्टि यूरोपियन पीपुल्स पार्टी के उपाध्यक्ष सिगफ्रीड मुरेशान ने की। उन्होंने कहा कि जिस ट्रेड डील को जल्द मंजूरी मिलनी थी, वह बदलते राजनीतिक हालात की वजह से अब कुछ समय के लिए टाल दी गई है।

मुरेशान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हम जुलाई 2025 में हुए EU–US ट्रेड समझौते को जल्द मंजूरी देने वाले थे, जिससे अमेरिका से यूरोपीय संघ में आने वाले सामान पर टैरिफ शून्य हो जाता। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए अब इस मंजूरी को रोकना पड़ेगा।”

जुलाई 2025 में अमेरिका और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच यह फ्रेमवर्क डील लंबे समय से चले आ रहे व्यापार और टैरिफ विवादों को सुलझाने के लिए की गई थी। इसका मकसद ट्रांस-अटलांटिक व्यापार में स्थिरता और भरोसा लाना था। लेकिन ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के हालिया बयानों से इस समझौते पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर डेनमार्क और कुछ यूरोपीय देश ग्रीनलैंड को बेचने पर सहमत नहीं होते हैं, तो अमेरिका उन पर नए टैरिफ लगाएगा। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है।

ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जरूरी है। उन्होंने चीन और रूस की रणनीतिक दिलचस्पी का हवाला दिया। ट्रंप ने बातचीत की बात भी कही, लेकिन साथ ही टैरिफ बढ़ाने की साफ समय-सीमा भी तय कर दी।

ट्रंप के मुताबिक, 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड से अमेरिका भेजे जाने वाले सभी सामान पर 10% टैरिफ लगाया जाएगा। इसके बाद 1 जून 2026 से यह टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। यह शुल्क तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड की “पूरी और स्थायी खरीद” को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता।

राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और उसके खनिज संसाधन अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेतृत्व ने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है और कहा है कि ग्रीनलैंड को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार है।

इसके बाद मुरेशान ने एक और बयान में कहा कि ट्रंप की घोषणा ने ट्रेड डील का सबसे बड़ा फायदा ही खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “पिछले साल की EU–US ट्रेड डील से हमें केवल स्थिरता मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब कई EU देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा से वह स्थिरता खत्म हो गई है। यही वजह है कि इस डील की मंजूरी टालना सही फैसला है।”

इस बढ़ते तनाव के बीच डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। वहीं जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड्स और फिनलैंड ने भी आर्कटिक क्षेत्र में छोटे सैन्य दल तैनात किए हैं।

 

यूरोप में इस स्थिति को लेकर NATO के भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। कई यूरोपीय नेताओं का कहना है कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा करने की कोशिश करता है, तो इससे NATO गठबंधन को गहरा झटका लग सकता है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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