यूपी में ठंड के साथ जहरीली हवा का दोहरा संकट, नोएडा-गाजियाबाद सबसे प्रभावित

लखनऊ, 10 दिसंबर 2025 – उत्तर प्रदेश में शीत लहर से ठिठुरते लोगों के सामने अब एक और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है – वायु प्रदूषण का बढ़ता संकट. प्रदेश के प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है, जिससे नागरिकों का जीवन दूभर हो गया है. नोएडा और गाजियाबाद जैसे महानगरों में वायु गुणवत्ता लगातार अत्यंत खराब श्रेणी में बनी हुई है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है.
दिल्ली से सटे शहरों में सबसे बुरा हाल
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़े उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और नोएडा जिले वर्तमान में वायु प्रदूषण के भयावह दौर से गुजर रहे हैं. दोनों शहरों में वायु की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में स्थिर बनी हुई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद का लोनी क्षेत्र सर्वाधिक प्रदूषित इलाका बना हुआ है. इसी प्रकार नोएडा के अधिकांश क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब श्रेणी में जारी है.
लोनी में दम घोंटती हवा, 320 पर पहुंचा एक्यूआई
सीपीसीबी द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, आज 10 दिसंबर 2025 सोमवार को भी गाजियाबाद के लोनी इलाके ने सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र का खिताब बरकरार रखा है. आज प्रातः 6 बजे लोनी में वायु प्रदूषण का स्तर 320 एक्यूआई पर दर्ज किया गया, जो अत्यंत खतरनाक श्रेणी में आता है. इसके अलावा गाजियाबाद के अन्य इलाकों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है – संजय नगर में एक्यूआई 236 और इंदिरापुरम में 257 रिकॉर्ड किया गया है.
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में भी कोई राहत नहीं
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की वायु गुणवत्ता में भी कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिख रहा है. यहां की हवा भी निरंतर घुटन भरी बनी हुई है. आज नोएडा के सेक्टर-125 में वायु गुणवत्ता सूचकांक 298 पर पहुंच गया, जबकि सेक्टर-116 में यह आंकड़ा 295 रहा. सेक्टर-62 में एक्यूआई 238 पर दर्ज हुआ है.
हालांकि, ग्रेटर नोएडा में मंगलवार को वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार देखा गया है. नॉलेज पार्क-3 में एक्यूआई 193 रहा, जबकि नॉलेज पार्क-5 में यह 285 पर दर्ज किया गया है.
राजधानी लखनऊ भी प्रदूषण की चपेट में
प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी इस वायु संकट से अछूती नहीं है. यहां ठंड और ठहरी हुई हवाओं के कारण प्रदूषण का स्तर निरंतर बिगड़ता जा रहा है. लखनऊ के लालबाग इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक 268 तक पहुंच गया है, जो खराब श्रेणी में वर्गीकृत होता है. यद्यपि लखनऊ के कुछ अन्य इलाकों में एक्यूआई का औसत 150-160 के आसपास बना हुआ है, जो अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति दर्शाता है.
ठंड और प्रदूषण के इस दोहरे संकट ने उत्तर प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और श्वास रोगियों के लिए स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दी है.





